भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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मन्दी-मन्दी चाल शनैश्चर है । ऐसी महामनोहर नवग्रहमयी युवतीकी सेवकाई स्वयं नवग्रह करते हैं ; अतः उसके समान फलदायिनी और कौन है ?

छप्पय ।

केश राहु सम जान, चन्द्र सौ सोहत आनन । द्वादश में द्वे अर्क नैन, केतुहि श्लकानन ॥ मन्द हास है युक्त, बुधै बानी कहि जानो । सुरगुरु जान उरोज, कर्ण मंगलहि बखानो ॥ अति मन्द चाल सोई शनैश्चर, महामनोहर युवति यह । तेहि सम फलदायकको देखियत, जाको सेवत नवग्रह ॥१३॥

सार— मृगनयनी सुन्दरी नवयुवती प्रकाश- मान ग्रहपुञ्जके समान चित्ताकर्षक और मनो- हर होती है । उसकी हृदयहारिणी छविका वर्णन करना कठिन है ।

16. That woman bent under the load of heavy breasts, shining with moon-like face and walking with slow steps, looks like a planet. (Guru means heavy as well as Jupiter-planet. Sanaishchar means slow steps as well as Saturn—the poet takes these words in their duplicate meanings and says that she looks like planets.)

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