भारतकोश
शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा

स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)

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( ७६ )

खुलासा—उस स्त्रीका शरीर बहुमूल्य रत्नोंसे बना हुआ मालूम होता है ; क्योंकि उसका चेहरा चन्द्रकान्त मणिके सदृश, उसके गहरे नीले बाल नीलमणिके समान और उसकी सुखं हथेलियाँ पद्मराग मणिके जैसी हैं ।

उस स्त्रीके अंग-प्रत्यङ्ग रत्नोंके समान शोभायमान हैं । उसके चन्द्रसम मुखको देखकर चन्द्रकान्त मणिका, उसके नीले बालोंको देखकर नीलमका और लाल कमल सी हथेलियोंको देखकर लालों या पद्मराग-मणिका धोखा होता है ।

गुज़ब की खूबसूरती है ! बलाका हुन्न है ! अगर वह कामिनी कहीं जवाहिर-जड़े हुए जेवर पहन ले, तब तो, बकौल महाकवि दाग, औरभी गुज़ब हो जाय :—

एक तो हुस्न बलाका, उसपै बनावट आफ़त ।

घर बिगाड़ेंगे हज़ारोंके, सँवरने वाले ॥

एक तो परले सिरकी खूबसूरती है ही और फिर उस पर सजावट है । ये सजने-सँवरने वाले हज़ारोंके घर बिगाड़ेंगे ।

देखना ऐ जौक ! होंगे आज फिर लाखोंके खून ।

फिर जमाया उसने, लाले लवपै लाखा पानका ॥ जौक ।

छन्दरी मालूम होती है । क्योंकि चन्द्रकान्त, महानौल और पद्मराग शब्दोंके दो-दो अर्थ हैं । जैसे, चन्द्रकान्त=(१) चन्द्रमाकी सी कान्ति-वाला, (२) चन्द्रकान्त मणि । महानौल=(१) बोर नीला, (२) नौलमणि या नीलम । पद्मराग=(१) कमलके समान छल, (२) पद्मरागमणि, जाल या माषिक ।