शृंगार शतक
Shringar Shatak
भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य द्वारा
स्रोत: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (उद्गम)
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आराधना-उपासना करनेसे जो सुख मिलता है, वह क्षणस्थायी और झूठा है ; पर ईश्वरकी उपासना-परिस्थितशसे जो सुख मिलता है, वह अनन्तकालस्थायी और सच्चा है ।
दोहा ।
चन्द्रकान्त-सम सुख लसत, नीलम केशहि पास ।
पद्मराग-सम कर लसै, नारी रत्न-प्रकाश ॥२०॥
सार—नारी रत्नों की खान है। उसमें नव रत्नों की शोभा मौजूद है ।
20. That woman with her face like Chandrakanta jewel, her hair like that of Mahanil jewel and her two hands bearing the colour of Padmaraga jewel shines like a heap of jewels.
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समोहयन्ति मद्यन्ति विडम्बयन्ति
निर्भत्सयन्ति रमयन्ति विषादयन्ति ॥
एताः प्रविश्य सदयं हृदयं नराणां
किं नाम वामनयना न समाचरन्ति ॥२१॥
चतुर भुगनयनी खियाँ पुरुषके हृदयमें एक बार दयासे घुसकर, उसे मोहित करतीं, मदोन्मत्त करतीं, तरसातीं, चिढ़ातीं, धमकातीं, रमण करतीं और विरहसे दुख देतीं हैं । ऐसा कौनसा नाम है जिसे ये भुगलोचनी नहीं करतीं ? ॥२१॥