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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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७६ | शुक्रनीतिः

गतिं शिक्षां चिकित्सां च सत्त्वं सारं रुजं तथा ।
हिताहितं पोषणं च मानं यानं दन्तो वयः ॥ १३१ ॥
शूरश्च व्यूहवित्प्राज्ञः कार्योऽश्वाधिपतिश्च सः ।

अश्वाधिपति के लक्षण— जो पुरुष घोड़ों के हृद्गत भावों को एवं जाति, रंग, रोमों की भौंरी के द्वारा उनके गुणों को तथा उनकी चाल, शिक्षा, चिकित्सा, सत्त्व (बल), सार (क्षमता), रोग, हिताहित (शुभ या अशुभ) फल, पालन, मान (ऊंचाई आदि), उन पर गमन करना, दाँतों से अवस्था को जानने वाला, शूर, व्यूह-रचना का जानने वाला, अत्यन्त बुद्धिमान हो उसे घोड़ों का अध्यक्ष बनाना चाहिये ।

एभिर्गुणैश्च संयुक्तो धुर्यान्युग्यांश्च वेत्ति यः ॥ १३२ ॥
रथस्य सारं गमनं भ्रमणं परिवर्तनम् ।
समापतत्सु शस्त्रास्त्रलक्ष्यसंधाननाशकः ॥ १३३ ॥
रथगत्या स रथपो ह्यसंयोगगुप्तिवित् ।

सारथि के लक्षण— जो पुरुष उक्त गुणों से युक्त होते हुये भी भार-वहन करने में समर्थ रथ में जोते जाने वाले घोड़ों को एवं रथकी दृढता आदि, चलाना, घुमाना, बदलना जानता है, और रथ की विशेष गति से शत्रुओं के द्वारा चलाये हुये शस्त्रास्त्रों के लक्ष्य को विफल बनाने वाला, तथा शत्रुओं के घोड़ों के साथ मुठभेड़ होने पर अपने घोड़ों को बचाने की कला जानने वाला हो उसे रथाध्यक्ष या सारथि बनाना चाहिये ।

सादिनश्च तथा कार्याः शूरा व्यूहविशारदाः ॥ १३४ ॥
वाजिगतिविदः प्राज्ञाः शस्त्रास्त्रैर्युद्धकोविदाः ।

घुड़सवार के लक्षण— और जो शूर, व्यूह-रचना में पण्डित, घोड़ों की चालों को जानने वाले, बुद्धिमान तथा शस्त्र तथा अस्त्र द्वारा युद्ध करने में कुशल हों उन्हें घुड़सवार बनाना चाहिये ।

चकितं रेचितं वल्गितकं धौरितमाप्लुतम् ॥ १३५ ॥
तुरं मंदं च कुटिलं सर्पणं परिवर्तनम् ।
एकादशास्कन्दितं च गतीरश्वस्य वेत्ति यः ॥ १३६ ॥
यथाबलं यथार्थं च शिक्षयेत्स च शिक्षकः ।

अश्वशिक्षक के लक्षण— जो चकित (चक्राकार में घुमाना), रेचित (गति विशेष), वल्गितक (बहुत ऊँची वस्तु को लाँघना), धौरित (गतिभेद), आप्लुत (मेंढक की भांति कूदना), तुर (तेज दौड़ना), मन्द (धीरे १ चलना), कुटिल (वक्रगति), सर्पण (सर्प की भांति टेढ़े-मेढ़े दौड़ना), परिवर्तन (पलटना), आस्कन्दित (शत्रुओं पर आक्रमण करना), इन ११ प्रकार