भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

पृष्ठ 279, कुल 526 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 279

चतुर्थाध्याये सुहृदादिलक्षणप्रकरणम्१६३

उत्पन्नोत्पत्स्यमानानां कार्याणां दण्डमावहेत् ।

मानसिकादि ४ अपराधों की परीक्षा का निर्देश— नेत्र तथा मुख की भङ्गी आदि भावों से मानसिक अपराध को एवं क्रिया के द्वारा कायिक, कर्कश वचनों से वाचिक और सहवास से सांसर्गिक अपराध के गौरव और लाघव को समझकर उत्पन्न हुये तथा आगे होनेवाले कार्यों (अपराधों) के संबन्ध में दण्डविचार करना चाहिये ।

प्रथमं साहसं कुर्वन्नुत्तमो दण्डमर्हति ॥ ७२ ॥
न्याय्यं किमिति संपृच्छेत् तवैवेयममत्कृतिः ।

दण्ड के योग्य पुरुषों के लक्षण— उत्तम पुरुष यदि प्रथम बार साधारण साहस (चोरी आदि पाप) करे तो क्या यह तुम्हारा कार्य न्याय युक्त हुआ है ? और क्या तुम्हारा ही किया हुआ यह अपराध है । इसको उससे पूछ कर छोड़ देना चाहिये । उसके बाद पुनः करने पर प्रथम साहसदण्ड नामक (२५० पैसों का) दण्ड (जुर्माना) करना चाहिये ।

अपराधं यथोक्तं च द्विगुणं त्रिगुणं ततः ॥ ७३ ॥

यदि उत्तमजन दुबारा वही (अपराध करे तो उससे दूना अर्थात् ५०० पैसों का, तिबारा करे तो ७५० पैसों का दण्ड (जुर्माना) करना चाहिये ।

मध्यमं साहसं कुर्वन्नुत्तमो दण्डमर्हति ।
धिग्दण्डं प्रथमं चाद्यसाहसं तदनन्तरम् ॥ ७४ ॥
यथोक्तं तु तथा सम्यग्यथावृद्धि ह्यनन्तरम् ।

उत्तम पुरुष पूर्वकी अपेक्षा अधिक मध्यम साहस (अपराध) करे तो उसे दण्ड इस प्रकार देना चाहिये अर्थात् उत्तम पुरुष यदि प्रथम उक्त अपराध साधारण रीति से करे तो उसे धिक्कार वचन सुनाकर दण्ड देना चाहिये उसके बाद यदि करे तो प्रथम साहस दण्ड (२५० पैसों का जुर्माना) करना चाहिये उसके बाद अपराधों की वृद्धि के अनुसार उक्त रूप से द्विगुण, त्रिगुण दण्ड (जुर्माना) अच्छी तरह से करे ।

उत्तमं साहसं कुर्वन्नुत्तमो दण्डमर्हति ॥ ७५ ॥
प्रथमं साहसं चादौ मध्यमं तदनन्तरम् ।
यथोक्तं द्विगुणं पश्चादवरोधं ततः परम् ॥ ७६ ॥

उत्तम पुरुष के विषय में प्रथमादि अपराधों के दण्डों का एवं अन्त में रोक देने का निर्देश— और उत्तम पुरुष यदि उत्तम साहस (अत्यधिक अपराध) करे तो इस भांति दण्ड देना चाहिये कि—प्रथम अपराध होने पर प्रथम साहस दण्ड (२५० पैसों का जुर्माना), उसके बाद पुनः अपराध करने पर मध्यम साहस दण्ड (५०० पैसों का जुर्माना), उसके बाद भी अपराधः

१३ शु०