शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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|---|---|---|---|
| पराधीन-पण्डितों के व्यवहार का निर्देश | १२७ | आततायियों के लक्षण | १३२ |
| इन्द्रियों को वश में रखने का निर्देश | ,, | एक क्षण भी स्त्री आदि की उपेक्षा न करने का निर्देश | ,, |
| इन्द्रियों को वश में न रखने से अनर्थ का निर्देश | १२८ | विरुद्ध राजादिक जहां हों वहां एक दिन भी रहने का निषेध | ,, |
| स्त्रियों के स्पर्श की भी अनर्थकारिता का निर्देश | ,, | अविवेकी राजादिक से धनादि की इच्छा करने का निषेध | १३३ |
| स्त्रियों के प्रति सम्बोधन-प्रकार | ,, | मात्रादिक के पालनादि न करने पर शोक न करने का निर्देश | ,, |
| एक क्षण भी स्त्रियों के स्वातन्त्र्य का निषेध | ,, | सावधानी से राजादि की सेवा करने का निर्देश | १३४ |
| यत्नपूर्वक स्त्रियों की रक्षा करने का निर्देश | १२९ | माता आदि के साथ विरोधादि करने का निषेध | ,, |
| चैत्यादिकों के लंघन का निषेध | ,, | स्वजनादि से विरोधादि एवं स्त्री आदि से विवाद का निषेध | ,, |
| तैर कर नदी को पार आदि करने का निषेध | ,, | अकेला स्वादिष्ट भोजनादि का निषेध | ,, |
| देरतक उकरू बैठने, रात्रि में वृक्ष पर चढ़ने आदि का निषेध | १३० | अन्य धर्म के सेवन का निषेध | ,, |
| सूर्य को निरन्तर देखने का निषेध | ,, | त्याज्य निद्रादि दोषों का निर्देश | ,, |
| सन्ध्या समय में भोजनादि का निषेध | ,, | मनुष्य को कौन सा कार्य करना और कौन सा छोड़ना चाहिये इसका निर्देश | १३५ |
| व्यवहार में लोक की आचार्य्यता का कथन | १३१ | बिना पूछे किसी से कुछ कहने का निषेध | ,, |
| राजादिगत धर्म में दोष लगाने का निषेध | ,, | बिना अनुभव के स्वाभिप्राय प्रकट करने का निषेध | ,, |
| आग्रहपूर्वक भाषण का निषेध | ,, | दम्पती आदि के बीच में किसी की साक्षी न देने का निर्देश | १३६ |
| किञ्चित् भी पाप का स्मरण करने का निषेध | ,, | आपत्ति में विचलित होने एवं मर्मवेधी बातें करने का निषेध | ,, |
| अच्छे का ग्रहण एवं बुरे के त्याग का निर्देश | ,, | अश्लील बातें आदि करने का निषेध | ,, |
| सार को यत्नपूर्वक ग्रहण करने का निर्देश | १३२ | लोकनिन्दित आदि कार्य करने का निषेध | ,, |
| अधर्मरत-मित्र-पुत्रादि को राज्य से निकाल देने का निर्देश | ,, |