शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| रात्रि में सोने के समय का एवं दीनादिक-उपहास के निषेध का निर्देश १४४ | निन्दित भी कार्यों का बड़ों के लिये भूषण होने का निर्देश १४९ |
| कार्य-साधक के कृत्यों का वर्णन १४५ | बिना अनुमति के श्रेष्ठ के संमुख बैठने का निषेध ,, |
| दुर्वचन का एवं गुरुजनादि की आज्ञा के उल्लङ्घन का निषेध ,, | मूर्ख का स्वामी बनने की इच्छा का निषेध १५० |
| असत् कार्य करानेवाले गुरु को भी बोध कराने का एवं छोटे के भी समुचित बात मानने का निर्देश ,, | आवश्यक कार्य को सर्वप्रथम करने का निर्देश ,, |
| बुरे कार्य में देरी करने का निर्देश ,, | |
| जगत् को वश में करने के उपाय ,, | |
| तरुणी स्त्री को इ तन्त्र छोड़कर जाने का निषेध ,, | वश करने के उपायों की दुर्जनों के विषय में विफलता का निर्देश १५१ |
| साध्वी भार्यादि का यत्नपूर्वक पालन का निर्देश १४६ | वेदादि के अभ्यास की हितकारिता का निर्देश ,, |
| जीवन्मृत पुरुषों का निर्देश ,, | मनुष्यों के ४ व्यसनों का निर्देश ,, |
| गुप्त रखने योग्य बातों का निर्देश १४७ | कूट व्यवहार का निषेध ,, |
| देशाटनादि की कर्त्तव्यता ,, | विहित कार्य करने का निर्देश ,, |
| देशाटन के लाभ ,, | रात्रि में सुखपूर्वक न सो सकनेवालों का निर्देश १५२ |
| सभा में बैठने से लाभ का वर्णन ,, | योग्यता न रहने पर बड़ों के अनुकरण करने एवं सर्पादि पकड़ने के लिये एकाकी गमन का निषेध ,, |
| बहुत से शास्त्रों के अध्ययन के फल ,, | मारनेवाले गुरु को भी मारने का एवं कलह में सहायता 'न करने का निर्देश ,, |
| वेश्यादर्शन के फल १४८ | गुरुजनों के आगे प्रौढपाद बैठने का निषेध ,, |
| पण्डितों के साथ मैत्री के फल ,, | उत्तम पुरुष के लक्षण ,, |
| अपने लिये केवल भोजन बनाकर खाने का निषेध ,, | स्त्री के कथनमात्र से बिना स्वयं अनुभव किये समझने का निषेध १५३ |
| गुरुजनादि के लिये मार्ग देने का निर्देश ,, | स्त्रियों के ८ दुर्गुणों का निर्देश ,, |
| शकटादिकों से दूर रहकर चलने का निर्देश ,, | |
| शृङ्गी आदि का विश्वास करने का निषेध १४९ | |
| शयनादि के निषेध के विषय ,, | |
| बड़ों की आज्ञा के बिना उनके साथ कार्य करने का निषेध ,, |