शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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|---|---|---|---|
| काम, क्रोध तथा लोभ त्याग कर दण्ड देने का निर्देश | १९१ | पतली रस्सी या छड़ी आदि से मारने योग्य के लक्षण | १९६ |
| 'राजा ऊपर से क्रूर होकर दण्ड देवे' इसका निर्देश | ,, | नीच कर्म कराने योग्य अपराधी का निर्देश | ,, |
| चुगलखोरों से देश नष्ट होने का निर्देश | १९२ | वध की शिक्षा कदापि न देने का निर्देश | ,, |
| उत्तम राजा के लक्षण तथा स्वयं दोषमुक्त होने का निर्देश | ,, | अपराधी के असहाय आदि को दण्ड न देना | ,, |
| अपराध के ४ भेद पुनःप्रत्येक के दो दो भेदों का निर्देश | ,, | देशनिष्काशन योग्य अपराधी | १९८ |
| पुनः उक्त अपराधोंके २ भेद एवं सभी अपराधों के पुनः ४ भेदों का निर्देश | ,, | मार्ग-संरक्षण योग्य का निर्देश | १९९ |
| मानंसिकादि ४ अपराधों की परीक्षा का निर्देश | १९३ | संसर्ग से दूषित को दण्ड देकर सन्मार्ग की शिक्षा देने का निर्देश | ,, |
| दण्ड के योग्य पुरुषोंके लक्षण | ,, | राजादिकों से बिगाड़ करनेवाले को शीघ्र नष्ट कर देने का निर्देश | ,, |
| उत्तम पुरुष के विषय में प्रथमादि अपराधों के दण्डों का एवं अन्त में जेल देने का निर्देश | ,, | गणों की दुष्टता करने पर उपाय | ,, |
| अधर्मशील राजा को सदैव भय दिलाने को प्रजा के लिये निर्देश | ,, | ||
| संरोध और नीच कर्म के योग्य पुरुष के लक्षण | १९४ | अधर्मशील राजा और प्रजा के तत्काल नष्ट हो जाने का निर्देश | २०० |
| शास्त्रोक्त दण्डनीय पुरुषों के लक्षण | ,, | ||
| आजीवन बन्धन योग्य पुरुष के लक्षण | ,, | माता आदि के भरण-पोषण का त्याग करनेवाले के लिये दण्ड का निर्देश | ,, |
| मार्गों पर झाडू लगाने योग्य पुरुष के लक्षण | १९५ | उत्तमादि साहस दण्ड के एवं पण आदि के लक्षण | २०१ |
| अधम पुरुषों के बारम्बार अपराध करने पर दण्ड का प्रकार | ,, | कोश के लक्षण | ,, |
| धनवर्ग से अपराध करने पर दण्ड का निर्देश | ,, | सुखप्रद कोश का निर्देश | ,, |
| दुःखप्रद कोश का निर्देश | ,, | ||
| बन्धन तथा ताडन योग्य के लक्षण | १९६ | अन्यायोपार्जित कोश के दुष्टफलों का निर्देश | २०२ |