शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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|---|---|---|---|
| सुपात्र तथा अपात्र के लक्षणादि का निर्देश | २०२ | मूर्ख के लक्षण | २०७ |
| अधर्मशील राजा के धन को हर लेने का निर्देश | ,, | राजा को परीक्षकों से स्वयं रत्न की परीक्षा कराने का निर्देश | ,, |
| शत्रु के अधीन राज्य होने के कारणों का निर्देश | ,, | हीरा आदि नव महारत्नों का निर्देश | २०८ |
| देवोत्तर-संपत्ति पर कर लगाकर धन न बढ़ाने का निर्देश | ,, | नवरत्नों के वर्ण और नवग्रहों का निर्देश | ,, |
| आपत्ति में अधिक कर बढ़ाने का निर्देश | ,, | सम्पूर्ण रत्नों में वज्र (हीरा) रत्न की श्रेष्ठता का निर्देश | २०९ |
| आपत्तिरहित होने पर सूद सहित धन वापस करने का निर्देश | २०३ | श्रेष्ठ रत्नों के लक्षण | ,, |
| प्रबल दण्ड से अनिष्ट फल | ,, | असत् रत्न के लक्षण | ,, |
| कोश संग्रह करने का प्रमाण | ,, | पुत्रार्थिनी को वज्र धारण करने का निषेध तथा बहुत दिन धारण किये मोती और मूंगा के हीन होने का निर्देश | ,, |
| प्रजा-संरक्षण के फल | ,, | दोषवर्जित रत्न के लक्षण | २१० |
| राष्ट्रवृद्धि के तीन कारण | २०४ | मूल्य अधिक और कम होने के कारण | ,, |
| नीति-निपुणता से कोशवृद्धि का यत्न करने का निर्देश | ,, | मौक्तिक की उत्पत्ति के स्थानों का निर्देश | ,, |
| श्रेष्ठादिनृप के ३ लक्षण | ,, | मोती के रंग और भेद का निर्देश | ,, |
| नीचादि धन के लक्षण | ,, | कृत्रिम मोती के निर्माण का स्थान | २११ |
| प्रजा के सन्ताप से सबंश राजा के नाश का निर्देश | २०५ | मोती की परीक्षाविधि-निर्देश | ,, |
| धान्य-संग्रह करने के प्रमाण का निर्देश | ,, | रत्नों का तुलामान निर्देश | ,, |
| संग्रह योग्य धान्य आदि की परीक्षा का निर्देश | ,, | वज्र का मूल्य-विचार | २१२ |
| ओषधि आदि सब वस्तुओं का संचय करने का निर्देश | २०६ | काले और रक्त बिन्दुवाले रत्न के न धारण का निर्देश | २१३ |
| संगृहीत धन की यत्न से रक्षा करने का निर्देश | ,, | माणिक्यादिकों का मूल्य-विचार | ,, |
| स्वकार्य में सदा सजग रहने का निर्देश | २०७ | गोमेद के उन्मान के योग्य न होने का निर्देश | ,, |
| संचय की रक्षा न कर सकने पर मूर्खता होने का निर्देश | ,, | अत्यन्त गुण वालों का मान से मूल्य न होने का निर्देश | ,, |