शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| मोतियों की मूल्य-कल्पना | २१३ | काष्ठ आदि से कर लेने के प्रकार का निर्देश | २१९ |
| मोती के भेद और लक्षण | २१४ | भूमिभागादि को तत्काल लेने का निर्देश | २२० |
| सुवर्णादि सात धातुओं का निर्देश | ” | किसान को भागपत्र लिख देने का एवं ग्राम के किसी धनी को प्रतिभू बनाकर उसी से कर लेने का निर्देश | ” |
| सुवर्णादि ७ धातुओं के तरतम भाव | ” | क्वचित् कर लेने के निषेध का निर्देश | ” |
| स्वर्णादि धातुओं के गुण | २१५ | व्यापारी आदि से लाभ का ३२ वाँ भाग लेने का निर्देश | ” |
| धातुओं के मूल्य का प्रमाण | ” | दूकानदार आदि से भूमि का कर लेने का निर्देश | २२१ |
| अधिक मूल्य गौ के लक्षण | ” | राष्ट्र के दो प्रकारों का निर्देश | ” |
| बकरी आदि के मूल्य का प्रमाण | २१६ | राज्य तथा राजा की सर्वश्रेष्ठता एवं देवतुल्यता का निर्देश | ” |
| गौ आदि के उत्तम मूल्यों का निर्देश | ” | राजा को देश के पुण्य और पाप का भोक्ता होने का निर्देश | २२२ |
| हाथी आदि के उत्तम मूल्यों का निर्देश | ” | नरक के लक्षण का निर्देश | ” |
| उत्तम अश्व आदि के लक्षण और मूल्य का निर्देश | ” | राजा के धर्मिष्ठ बनने का निर्देश | ” |
| देश-कालानुसार सबों की मूल्य-कल्पना करने का निर्देश | २१७ | सर्वधर्म-रक्षण से देश-रक्षा होने का निर्देश | ” |
| शुल्क के लक्षण | ” | मुख्य जाति के ४ प्रकारों का तथा संकरता से जाति की अनन्तता का निर्देश | २२३ |
| वस्तुओं के शुल्क को एक बार ही ग्रहण करने का निर्देश | ” | जरायुजादि चार प्राणियों की जाति का निर्देश | ” |
| किसान से भाग ( मालगुजारी ) लेने का प्रमाण | २१८ | द्विजों तथा ब्राह्मणों के कर्मों का निर्देश | ” |
| उत्तम कृषिकृत्य के लक्षण | ” | क्षत्रिय और वैश्य के कर्मों का निर्देश | २२४ |
| तडागादिकों से संपन्न भूमि से प्राप्त राजभाग का तारतम्य निर्देश | ” | शूद्रादि के कर्मों का निर्देश | ” |
| रजतादियुक्त भूमि के लिये राज-भाग-नियम | २१९ | ||
| तृणकाष्ठादिविक्रेता आदि से २०वाँ भाग कर लेने का निर्देश | ” | ||
| बकरी आदि की वृद्धि से ८ वां भाग लेने का निर्देश | ” |