शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| ब्राह्मणादि के लिये कृषि-भेद का निर्देश | २२४ | तर्क लक्षण | २२८ |
| ब्राह्मण के अतिरिक्त अन्य को भिक्षा निन्दित होने का निर्देश | ,, | सांख्य लक्षण | २२९ |
| द्विजाति को साङ्गवेद पढ़ने का निर्देश | ,, | वेदान्त लक्षण | ,, |
| गुरु का लक्षण | २२५ | योग लक्षण | ,, |
| मुख्य विद्या ३२ और कला ६४ होने का निर्देश | ,, | इतिहास लक्षण | ,, |
| विद्या और कला के लक्षण | ,, | पुराण लक्षण | ,, |
| विद्याओं में वेद तथा उपवेद के नामों का निर्देश | ,, | स्मृति लक्षण | ,, |
| वेदों के ६ अंगों का निर्देश | ,, | नास्तिक मत लक्षण | २३० |
| मीमांसादि विद्याओं के नामों का निर्देश | ,, | अर्थशास्त्र लक्षण | ,, |
| वेद के मन्त्र और ब्राह्मण दो भागों का निर्देश | २२६ | कामशास्त्र लक्षण | ,, |
| मन्त्र और ब्राह्मण के लक्षण | ,, | शिल्पशास्त्र लक्षण | ,, |
| ऋग्वेद के लक्षण | ,, | अलङ्कार शास्त्र लक्षण | ,, |
| यजुर्वेद के लक्षण | ,, | काव्य लक्षण | २३१ |
| सामवेद के लक्षण | ,, | देशभाषा लक्षण | ,, |
| अथर्ववेद के लक्षण | ,, | अवसरोक्ति लक्षण | ,, |
| आयुर्वेद के लक्षण | २२७ | यावन ग्रन्थ तथा मत लक्षण | ,, |
| धनुर्वेद के लक्षण | ,, | देशादि धर्म लक्षण | ,, |
| गान्धर्ववेद के लक्षण | ,, | गान्धर्व वेदोक्त ७ कलायें | २३२ |
| तन्त्र या आगम के लक्षण | ,, | आयुर्वेदोक्त १० कलाओं के लक्षण | ,, |
| शिक्षा के लक्षण | ,, | धनुर्वेदोक्त ५ कलाओं के लक्षण | २३३ |
| कल्प के लक्षण व भेद | ,, | पृथक् ४ कलाओं के लक्षण | २३४ |
| व्याकरण के लक्षण | २२८ | तडागकूपादि कलाओं के लक्षण | ,, |
| निरुक्त के लक्षण | ,, | ४ आश्रमों का नाम निर्देश | २३७ |
| ज्योतिष लक्षण | ,, | ४ आश्रमों में कृत्यों का निर्देश | ,, |
| छन्द लक्षण | ,, | स्त्री और शूद्र को देवपूजादि न करने का निर्देश | २३८ |
| मीमांसा लक्षण | ,, | स्त्रियों के लिये पतिसेवा से अन्य धर्म का निषेध | ,, |
| स्त्रियों के नित्य कृत्यों का निर्देश | ,, | ||
| साध्वी स्त्रियों को पैशुन्यादि-त्याग का निर्देश | २४० | ||
| यथोक्त पतिसेवा से पतिलोक जाने का निर्देश | ,, |
२ शु० सूची