भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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साक्षी के लक्षण और भेद का निर्देश२९८६० वर्ष से भोग में आती हुई वस्तु को किसी के द्वारा न छीने जा सकने का निर्देश३०४
साक्षी की विशेष परीक्षा न करने के विषय२९९आधि आदिका केवल भोग से नष्ट न होने का निर्देश३०५
बालादिकों को साक्षी योग्य न होने का निर्देश,,उपेक्षादि कारण से स्वामी को उसके फल प्राप्त न होने का निर्देश,,
साक्षी लेने में राजा को कालक्षेप न करने का निर्देश३००अब दिव्य कहने का निर्देश,,
प्रत्यक्ष साक्षी की साक्षी लेने का निर्देश,,त्रिविध साधन के अभाव में तीन प्रकार की विधियों का निर्देश,,
दण्ड्य और नीच साक्षी के लक्षण,,युक्ति के लक्षण,,
एक २ से साक्षी को कथन करने का निर्देश,,कार्यसाधक हेतुओं के लक्षण,,
साक्षी लेने के प्रकारों का निर्देश३०१धन ग्रहण करने योग्य प्रतिवादी के लक्षण३०६
लेख और साक्षी न मिलने पर भोग से ही विचार करने का निर्देश३०२जहां पर युक्ति भी असमर्थ हो, वहां पर एवं दुष्कर कर्म के लिये दिव्य करने का निर्देश,,
कुशलों और कुटिलों द्वारा बनावटी लेख कर लेने का निर्देश३०३दिव्य को न मानने पर 'धर्मतस्कर' होने का निर्देश,,
केवल साक्षियों से ही कार्यसिद्धि के न करने का निर्देश,,दिव्य को स्वीकार करनेवाले के उत्तम फलों का निर्देश,,
केवल भोगों से ही कार्यसिद्धि न होने का निर्देश,,दिव्य-निर्णय में पदार्थों का निर्देश३०७
अनुचित शंका उपस्थित करनेवाले को दण्ड देने का निर्देश,,अग्नि दिव्य के प्रकार का निर्देश,,
विपरीत शङ्का करने से अनवस्था होने का निर्देश,,शर तथा घट दिव्य के प्रकार का निर्देश,,
प्रामाणिक भोग के लक्षण,,जल दिव्य के प्रकार का निर्देश,,
केवल भोग बतानेवाले को चोर समझने का निर्देश३०४धर्माधर्म मूर्ति एवं तण्डुल दिव्यों के प्रकार का निर्देश३०८
केवल आगम (लेख) के भी प्रबल न होने का निर्देश,,शपथ दिव्य के प्रकार का निर्देश,,
अपराध-तारतम्य से दिव्यतारतम्य का निर्देश,,
दिव्य के निषेध का निर्देश३०९