शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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|---|---|---|---|
| जलादिकों से धन की रक्षा करनेवाले को दशवां भाग प्राप्त करने का निर्देश | ३१८ | स्वर्णकार की भृति का विचार | ३२२ |
| शिल्पी के लक्षण | ,, | धातुओं में मिलावट करने पर दूना दण्ड देने का निर्देश | ३२३ |
| नर्त्तकादियों का धनविभागविषयक निर्देश | ३१९ | दुर्ग-प्रकरण के आरम्भ में ऐरिण दुर्ग के लक्षण | ३२४ |
| चोरों का धनविभागविषयक निर्देश | ,, | पारिख तथा पारिघ दुर्ग के लक्षण | ,, |
| व्यापारी आदियों का धनविभागविषयक निर्देश | ,, | वनदुर्ग तथा धन्व दुर्ग के लक्षण | ,, |
| आपत्काल होने पर भी नवविध धनों को न देने का निर्देश | ,, | जलदुर्ग तथा गिरिदुर्ग के लक्षण | ,, |
| उत्तम साहस दण्ड के योग्य का निर्देश | ३२० | सैन्यदुर्ग तथा सहायदुर्ग के लक्षण | ,, |
| अस्वामिक धन को चोरों से लेनेवालों को दण्ड देने का निर्देश | ,, | ऐरिणादि दुर्ग का तारतम्य-निर्देश | ,, |
| त्यागयोग्य ऋत्विज और याज्य के लक्षण | ,, | सहाय तथा सैन्य दुर्गों की सब दुर्गों की साधनता का निर्देश | ३२५ |
| राजा को १२ वाँ या १६ वाँ लाभ पण्य में नियत करने का निर्देश | ,, | आपत्काल में अन्य दुर्गों के आश्रय की उत्तमता का निर्देश | ,, |
| व्यापारी के धन की व्यवस्था का निर्देश | ,, | अत्यन्त श्रेष्ठ दुर्ग के लक्षण | ,, |
| मूल से दूना ब्याज ले चुकने पर उत्तमर्ण को मूल ही दिलवाने का निर्देश | ३२१ | युद्ध-सहायक सामग्रियों से परिपूर्ण दुर्ग से निश्चित विजय होने का निर्देश | ३२६ |
| लिखित नष्ट हो जाने पर साक्षी के आधार पर उत्तमर्ण को धन दिलाने का निर्देश | ,, | सेना-निरूपण प्रकरण के आरम्भ में सेना के लक्षण | ३२७ |
| खोटी वस्तु बेचनेवाले को दण्ड देने का निर्देश | ,, | सेना के भेदों का वर्णन | ,, |
| शिल्पियों की भृति का विचार | ३२२ | स्वगमा और अन्यगमा सेना के लक्षण | ,, |
| सैन्य के प्रभाव का निर्देश | ,, | ||
| ६ प्रकार के बलों का निर्देश | ३२८ | ||
| २ प्रकार के सेनाबलों का निर्देश | ,, | ||
| मैत्र, स्वीय, मौल तथा साद्यस्क सेनाओं के लक्षण | ,, | ||
| सार-असार तथा शिक्षित-अशिक्षित सेनाओं के लक्षण | ३२९ | ||
| गुल्मीभूत, अगुल्मक, दत्तास्त्रादि तथा स्वशस्त्रास्त्र सेनाओं के लक्षण | ,, |