शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| कृतगुल्म, स्वयंगुल्म, दत्तवाहन और आरण्यक सेनाओं के लक्षण | ३२९ | घोड़ा और घोड़ी के शरीर में दक्षिण तथा वाम तरफ भौंरी के शुभ फल | ३३८ |
| शत्रुबल के तथा दुर्बल सेना के लक्षण | ” | अन्यथा होने पर फलाभाव का निर्देश | ” |
| सेना के शारीरिक बल बढ़ाने के उपाय | ” | भौंरियों के नीचे-ऊंचे होने में फलभेद | ” |
| शौर्यबल बढ़ाने के उपाय | ३३० | शुभ भौंरी के लक्षण | ” |
| सेनाबल, आत्मिकबल व बुद्धिबल बढ़ाने के उपाय | ” | भौंरी के स्थानानुसार घोड़े की उत्तमता | ३३९ |
| आयुर्बल के लक्षण | ” | भौंरी के स्थानानुसार घोड़े की मध्यमता | ” |
| सेना में पदाति आदियों की संख्या का नियम | ” | 'पूर्णहर्ष' अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| प्रतिमास में व्यय करने का प्रमाण | ३३१ | 'सूर्यसंज्ञक' अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| राजा के रथ का वर्णन | ” | अश्व-वृद्धिकर 'त्रिकूट' अश्व के लक्षण | ” |
| अनिष्ट तथा शुभप्रद गज का लक्षण | ३३२ | अन्य भौंरियों से युक्त अश्वों के लक्षण | ” |
| हाथी के ४ प्रकार | ” | यशोवर्द्धक तथा 'सव्यं' संज्ञक अश्व के लक्षण | ३४० |
| भद्रगज के लक्षण | ” | शिव-संज्ञक तथा क्रूर-संज्ञक के लक्षण | ” |
| मन्द्रगज के लक्षण | ” | इन्द्र-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| मृगगज के लक्षण | ” | विजय-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| मिश्रगज के लक्षण | ३३३ | पद्म-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| गजमान में अंगुलादिकों का प्रमाण | ” | भूपाल-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल | ” |
| भद्रगज के शरीर का मान | ” | चिन्तामणि-संज्ञक अश्व के लक्षण तथा फल | ३४१ |
| मन्द्र तथा मृग गज का मान | ” | ||
| उत्तमोत्तम अश्व के लक्षण | ” | ||
| उत्तम तथा मध्यम अश्व के लक्षण | ” | ||
| नीच अश्व के लक्षण तथा अश्व के अवयवों की मान-कल्पना | ३३४ | ||
| अश्व की ऊंचाई और लम्बाई का प्रमाण | ” | ||
| उत्तम अश्व के अन्य लक्षण | ३३८ | ||
| अश्व के भौंरी के दो भेद | ” |