शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| चारा आदि खिलाने के बाद तत्काल घोड़े की सवारी के दोष | ३४८ | मनुष्य और पशुओं का ताडन द्वारा वश में करने का एवं सैनिकों को धन-दण्ड से दण्डित न करने का निर्देश | ३५३ |
| घोड़ों के लिये उत्तम, मध्यम तथा नीच भोजनों का निर्देश | ३४९ | बैल आदिकों के निवास का सुरक्षित स्थल | ,, |
| घोड़ों की ६ प्रकार की गति का नाम-निर्देश | ,, | राज्य में सौ-सौ योजन पर सेना रखने का निर्देश | ३५४ |
| धारा गति के लक्षण | ,, | बोझ ले चलनेवालों का तारतम्य | ,, |
| आस्कन्दित गति के लक्षण | ,, | राजा को छोटे भी शत्रु पर अल्प साधन से गमन करने का निषेध | ,, |
| रेचित गति के लक्षण | ,, | युद्ध से भिन्न कार्यों में अयोग्य सैनिकों की नियुक्ति का निर्देश | ,, |
| प्लुत तथा धौरीतक गति के लक्षण | ,, | संग्राम में अधिक सेना की आवश्यकता का निर्देश | ,, |
| वल्गित गति के लक्षण | ,, | सन्नद्ध सेना का माहात्म्य | ३५५ |
| बैल के मुखादि का प्रमाण | ३५० | मौल सेना की प्रशंसा | ,, |
| पूज्य सप्तताल बैल के लक्षण | ,, | सेना में अवश्य भेद होने के कारण | ,, |
| श्रेष्ठ बैल के लक्षण | ,, | सेना का भेद होने से अनिष्ट फल | ,, |
| श्रेष्ठ ऊंट के लक्षण | ,, | राजा को शत्रु-सेना में भेद अवश्य डालने का निर्देश | ,, |
| मनुष्य और हाथियों की आयु तथा बाल्यादि अवस्था का प्रमाण | ,, | शत्रुओं को साधने का प्रकार | ३५६ |
| घोड़ा, बैल तथा ऊंट की आयु तथा अवस्थाओं का प्रमाण | ३५१ | शत्रुओं को जीतने का भेद से अन्य उपाय न होने का निर्देश | ,, |
| दांतों के द्वारा बैल व घोड़ों की अवस्था-ज्ञान का निर्देश | ,, | शत्रु की त्यागी हुई सेना को अपनी सेना में रखने का प्रकार-निर्देश | ,, |
| दांतों द्वारा घोड़ों के प्रथमादि वर्ष का ज्ञान | ,, | मित्र की सेना को अपनी सेना में रखने का प्रकार-निर्देश | ,, |
| निन्दित घोड़ों के लक्षण | ३५२ | अस्त्र और शस्त्र के लक्षण और भेद | ,, |
| दांतों द्वारा बैल व ऊंट के आयु की परीक्षा | ,, | ||
| अंकुश के लक्षण | ३५३ | ||
| घोड़ों की लगाम का वर्णन | ,, | ||
| बैल व ऊंट को वश में करने का उपाय तथा उनके मल-शोधनार्थ दंताली का वर्णन | ,, |