शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)
Shukra Niti of Shukracharya Hindi
महर्षि शुक्राचार्य द्वारा
स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)
DevanagariHindipublished526 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| मान्त्रिक अस्त्र के अभाव में नालिक अस्त्र का प्रयोग करने का निर्देश | ३५७ | यान तथा आसन के लक्षण | ३६३ |
| नालिक के २ प्रकारों का निर्देश | ,, | आश्रय व द्वैधीभाव के लक्षण | ३६४ |
| लघुनालिका (बन्दूक) के लक्षण | ,, | सन्धि करने योग्य पुरुषों का निर्देश | ,, |
| बृहन्नालिक (तोप) के लक्षण | ३५८ | उपहार रूप सन्धि की सर्वश्रेष्ठता का निर्देश | ,, |
| अग्निचूर्ण (बारूद) बनाने का प्रकार | ,, | शत्रु के बलानुसार उपहार की कल्पना के भेद | ,, |
| गोला बनाने का प्रकार | ,, | पार्श्ववर्ती अनार्य राजा से भी सन्धि करने का निर्देश | ,, |
| नालिक की व्यवस्था का निर्देश | ३५९ | सन्धि के अवसरों का तथा उनसे लाभ का निर्देश | ३६५ |
| बारूद बनाने के दूसरे अनेक प्रकारों का निर्देश | ,, | विग्रह करने योग्य पुरुष के लक्षण | ,, |
| तोप के गोले को लक्ष्य पर फेंकने की रीति | ,, | विग्रह होने के कारणों का तथा विग्रह और कलह के भेद का निर्देश | ३६६ |
| बाण का लक्षण | ,, | बलवान् शत्रु के साथ विग्रह करने का निषेध | ,, |
| गदा व पट्टिश के लक्षण | ३६० | निष्पाय दशा में विग्रह करने का निर्देश | ,, |
| खड्ग-प्रासि और कुन्त (भाला) के लक्षण | ,, | यान के पांच भेद | ,, |
| चक्र और पाश के लक्षण | ,, | विगृह्ययान के दो प्रकार के लक्षण | ३६७ |
| कवच और टोप के लक्षण | ,, | सन्धाययान के लक्षण | ,, |
| करज के लक्षण | ,, | संभूययान के लक्षण | ,, |
| युद्ध की इच्छा करने योग्य राजा का लक्षण | ३६१ | प्रसङ्गयान के लक्षण | ,, |
| युद्ध का सामान्य लक्षण | ,, | उपेक्षाययान के लक्षण | ,, |
| युद्ध के भेद और लक्षण | ,, | रास्तों में सेना को चलाने की व्यवस्था | ३६८ |
| युद्ध के लिये काल-विचार | ,, | नदी-पर्वतादि में भय की संभावना होने पर व्यूह बाँध कर चलने का निर्देश | ,, |
| युद्ध के लिये उत्तम देश का लक्षण | ३६२ | मकर, श्येन व सूचीमुख व्यूहों का नाम व योजना-स्थल का निर्देश | ,, |
| मध्यम युद्ध-देश के लक्षण | ,, | ||
| अधम युद्ध-देश के लक्षण | ,, | ||
| युद्ध के लिये सेना का विचार | ३६३ | ||
| मन्त्र के षड्गुणों के नामों का निर्देश | ,, | ||
| सन्धि के लक्षण | ,, | ||
| विग्रह के लक्षण | ,, |