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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
शकट, वज्र, सर्वतोभद्र, चक्रव्यूह, व्यालव्यूहों का नाम-निर्देश३६८उपाय करने से कार्य सिद्ध होने का निर्देश३७३
बाजा बजाने के ढङ्ग से संकेतों के जानने का निर्देश,,उद्योग की अवश्य-कर्तव्यता का निर्देश,,
सैनिकों को संकेतज्ञान कराने का निर्देश३६९भेद और समाश्रय की श्रेष्ठता का निर्देश,,
संकेतों के अनुसार सैनिकों को कार्य करने का निर्देश,,लाचारी होने पर युद्ध करने का निर्देश३७४
संकेतानुसार स्थिति रखने का निर्देश,,स्त्री, गौ, ब्राह्मण के रक्षार्थ युद्ध न करने से हानि,,
संकेतानुसार बाणादि चलाने आदि का निर्देश,,किसी के ललकारने पर क्षत्रिय को अवश्य युद्ध करने का निर्देश,,
संकेतानुसार गमनादि करने का निर्देश३७०आपत्काल में ब्राह्मण का क्षत्रिय धर्म करने का निर्देश३७५
सदा व्यूहबद्ध होकर अस्त्रादि चलाने का निर्देश,,शय्या पर पड़े २ क्षत्रिय को मरने का निषेध,,
अस्त्र-प्रयोगादि के समय सैनिकों की स्थिति का निर्देश,,रण छोड़ कर घर में क्षत्रिय को मरने का निषेध,,
क्रौञ्चव्यूह के लक्षण,,युद्ध में शत्रु को न मार सकने पर बन्धुओं के साथ युद्ध में लड़ते २ मर सकने मे क्षत्रियों की परम कर्तव्यता का निर्देश,,
श्येनव्यूह के लक्षण,,
मकरव्यूह के लक्षण,,
सूचीमुख तथा चक्रव्यूह के लक्षण३७१
सर्वतोभद्र व्यूह के लक्षण,,
शकट व व्यालव्यूह के लक्षण,,
सैन्य की न्यूनता व अधिकतानुसार एवं युद्धभूमि के अनुसार १ या २ व्यूहरचना का निर्देश,,युद्ध में पीछे पैर न हटाने तथा लड़कर मर जाने की प्रशंसा,,
लाचारी होने पर युद्ध करने का निर्देश,,
आसन के लक्षण व उस समय के कर्तव्य,,स्त्री, गौ, ब्राह्मण के रक्षार्थ युद्ध न करने से हानि,,
सन्धाय आसन के लक्षण३७२स्वामी के निमित्त करने का फल३७६
आश्रय के लक्षण,,युद्ध में वीरगति पाए हुए के लिये शोक करने का निषेध,,
द्वैधीभाव के लक्षण,,