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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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विषयपृष्ठविषयपृष्ठ
युद्ध में शूरतापूर्वक मरने का फल३७६शरणागत को लौटा देने में घोर नरक-प्राप्ति का निर्देश३७९
युद्ध में वीरगति पाने पर मुनिदुर्लभ लोक की सुगमता से प्राप्ति का निर्देश,,दुराचारी क्षत्रिय को मार डालने का निर्देश,,
शूरता की प्रशंसा व सर्वोत्तमता का निर्देश,,उत्तम, मध्यम, कनिष्ठ तथा अधम युद्ध के लक्षण,,
प्राणियों के अन्न का विचार,,सर्वोत्तम युद्ध के लक्षण३८०
सूर्यमण्डल भेदन करनेवाले दो पुरुषों का निर्देश३७७नालिकास्त्र युद्ध का लक्षण,,
आततायी ब्राह्मण व गुरु को मारने का निर्देश,,शस्त्रयुद्ध का लक्षण,,
शत्रु द्वारा संकट आ पड़ने पर आचार्य धर्मशास्त्रियों द्वारा उपाय पूछने की निरर्थकता का निर्देश,,बाहुयुद्ध का लक्षण,,
बाहुयुद्ध के ८ प्रकारों का निर्देश,,
जिससे शत्रु मारा जा सके ऐसी नीति पर चलने का निर्देश३७८बाहुयुद्ध के ८ प्रकारों को मित्रों के लिये प्रयोग का निषेध३८१
आततायी ब्राह्मण को शूद्रवत् जानकर मारने में दोषाभाव का निर्देश,,युद्ध के समय सेना की रचना,,
आततायी बालक को भी मारने में दोषाभाव का निर्देश,,युद्ध होने का क्रम,,
युद्ध में क्षत्रिय की भांति लड़ते हुये ब्राह्मण को मारने में दोषाभाव का निर्देश,,सेना के उपद्रुत होने पर लड़ने का निर्देश३८२
जीवन-रक्षार्थ युद्ध से भाग जाने पर दोष का निर्देश३७९सेना में फूट डालने में पाप का निर्देश,,
मित्र तथा स्वामी को छोड़ कर युद्धक्षेत्र से भाग आने पर दोष का निर्देश,,फूट जानेवाली सेना के दुःखदायिनी होने का निर्देश,,
मित्र की सहायता न करने से दोषभागी होने का निर्देश,,सामादि का ध्यान रखते हुये युद्ध करने का निर्देश,,
शत्रु पर चढ़ाई करते समय सेना को तनख्वाह बढ़ाने का निर्देश,,
युद्ध में नालास्त्र ( बन्दूक-तोप ) आदियों की योजना३८३
युद्ध में प्रहार करने के अयोग्य सैनिकों के लक्षण,,
वृद्ध-बालकादि राजा को मारने का निषेध३८४
बलवान शत्रु के नाशार्थ कूटयुद्ध की महत्ता,,