भारतकोश
शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

महर्षि शुक्राचार्य द्वारा

स्रोत: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished526 पृष्ठ

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राजा से बढ़कर बहुमत की महत्ता का निर्देश३९४शत्रु का राज्य हरण करने का उपाय३९७
हीन-राज्य राजा के आचरणों का निर्देश"राजा के बिना सेनापति आदि को भी शक्तिहीन होने का निर्देश"
राजा के दरिद्र हो जाने के कारणों का निर्देश"राज्य को वृक्ष की समता का निर्देश३९८
धार्मिक नीच राजा को भी श्रेष्ठ होने का निर्देश"राजा को अवश्य पालन करने योग्य नियमों का निर्देश"
धर्म तथा अधर्म की प्रवृत्ति में राजा की ही कारणता का निर्देश"पुत्र को राज्य देने के समय का निर्देश३९९
मनु आदि के मतानुसारी शुक्र की नीति होने का तथा ग्रन्थ-संख्या का निर्देश३९५राज्य पाने पर राजपुत्र के आचरणों का निर्देश"
शुक्रनीति-सार-चिन्तन का फल"मन्त्रियों का राजपुत्र के साथ करने योग्य व्यवहार का निर्देश"
शुक्रनीति के समान दूसरी नीति न होने का निर्देश"नवीन राजा के साथ मन्त्रियों को भी अनीतिपूर्ण व्यवहार करने का निषेध"
नीति-शेष कहने का निर्देश३९६नवीन राजा को राजभक्त मन्त्री आदि के मतानुसार न रहने का दुष्परिणाम"
शत्रु के छिद्रों को ढूँढ़ते रहने का निर्देश"नवीन मन्त्री आदि की नियुक्ति की व्यवस्था४००
शत्रु राजा को हीन-बल बनाने के लिये यत्न करने का निर्देश"धूर्त्त तथा साधु जन के अन्तर ज्ञात करने का निर्देश"
मौका देख कर शत्रु को नष्ट करने का निर्देश"धूर्त्त, जार (व्यभिचारी) और चोर में धूर्त की माया करने में श्रेष्ठता का निर्देश"
युद्ध में नियुक्त करने योग्य का निर्देश"धूर्त्तों की धूर्त्तता वर्णन"
दान-मान से रहित भी भृत्य को अपने राजा को न छोड़ने का निर्देश३९७बिना धूर्त्तता के अत्यन्त धन न मिलने का निर्देश४०१
राजा के द्रव्य को मेघ-जल के समान पुष्टिप्रद होने का निर्देश"राजा लोगों को दूसरे का धन हरण करने को स्वधर्म समझने का निर्देश"

३ शु० सूची