भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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, इष्टकल्पना = १०० का वर्ग = १०००० को ८ से और भाज्य से गुणा करने पर १६९ × १०००० × ८ = १३५२०००० । इसके मूल = ३६७७ में इष्ट संख्या = १०० गुणित हर = ८ = ८०० का भाग दे देने से ३६७७ ÷ ८०० = ४ ४७७/८०० यही आसन्न मूल होता है । यदि इष्ट अङ्क की कल्पना = १०००, १०००० इत्यादि जैसे-जैसे अधिक से अधिक इष्ट संख्या कल्पना करेंगे तो आसन्नमूल ४ ४७७/८०० से भी और अधिक सूक्ष्म में आवेगा । उपपत्ति से भी = यदि राशि = य/ल अतः य/ल = (य × ल × महान् इ. अङ्क²) / (य × ल × महान् इष्ट²) (य × ल × म. इ.²) / (ल² × म. इ.²) = √(य × ल × म. इ.²) / (ल × म. इ.) = √(य/ल) = सूक्ष्ममूल = ३६७७/८०० = ४.५९६२५८ दशमलव प्रणाली से भी हो जाता है । अतः सावयव अङ्कों का सूक्ष्ममूल गणित ज्ञान के

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