सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १२ ) वह कौन सी राशि है जिसे ३ से गुणा कर उसमें अपना ३/४ जोड़कर ७ से भाग देकर उसीका तीसरा भाग उसमें घटाकर शेष के वर्ग में ५२ घटाकर उसके मूल में ८ जोड़कर १० से भाग देने पर वह अंक २ होता है। हे बाले हे चंचलाक्षि यदि तुम विलोम विधि गणित जानती हो, तो वह राशि बताओ । यहाँ राशि का स्वांश अधिक या न्यून की जगह पर युत में ३/४ की जगह ३/७ और ऋण में १/३ की जगह १/२ समझिये । २ × १० = २०, २० - ८ = १२, ( १२ )² = १४४, १४४ + ५२ = १९६, १९६ का मूल = १४, १४ + १४/२ = २१ और २१ × ७ = १४७, १४७ - (१४७ × ३)/७ १४७ - ६३ = २८ यह दृश्य राशि उत्तर होता है । आचार्य ने जो व्यस्त गणित का सिद्धांत बताया है, तदनुसार उत्तर के साथ यहाँ पर भी सम्बोधन में चंचलाक्षि ! बाले ! आदि सम्बोधन लड़की को सम्बोधन कहना उचित नहीं है । ५—विश्लेष जाति का उदाहरण— “पञ्चांशोऽलि कुलात्कदम्बमगम”दिति — “हे मृगाक्षि ! हे कान्ते”!''''इत्यादि सम्बोधनों से बोधिता पत्नी ही कही जायेगी । भ्रमर समूह से उड़कर भ्रमर समूह का १/५ कदम्ब पुष्पों में, १/३ शिलीन्ध्र पुष्प में दोनों का त्रिगुणित अन्तर कुटज पुष्प में चला गया, जब उसी भ्रमर कुल में शेष १ भ्रमर रह गया तो वह भी अपने परिवार वियोग में उड़कर पारिवारिक सदस्यों की गवेषणा कर ही रहा था एक स्थल पर केतकी और मालती पुष्प वृक्षों ने उस भ्रमर को आकृष्ट किया जब वह मालती में पहुँच ही रहा था तो द्वेष से केतकी के गहन सुगन्धाकर्षण ने उस भ्रमर को अपने में आकृष्ट कर लिया और केतकी तक पहुँच, स्पर्श को समझ कर मालती ने पुनः ऐसा सौरभ फैलाया कि भ्रमर पुनः मालती की ओर आही रहा था कि पुनः केतकी की हरकत शुरू हो गयी, तात्पर्य कि भ्रमर आकाश में केतकी और मालती के मध्य में एक दूसरे के संदेश वाहक ( दूत ) की तरह हो गया । बताओ भ्रमर संख्या क्या थी···गणित सरल है १५ उत्तर आता है पर साहित्यक दृष्टि से यह स्पष्ट हो रहा है कि दो भार्यायों के बीच का नायक अकर्मण्य हो जाता है । एक पत्नी व्रती ही सुखी रहता है, इत्यादि साहित्य के रस प्रवाह का अंकगणित लड़की को पढ़ाया जाना क्या संभव है ? मर्यादा का ख्याल होना चाहिए, पत्नी के साथ ही यह रसास्वाद सम्पन्न अंकगणित का व्याख्यान समीचीन होता है ।