भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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( १३ ) गणित का यह निम्न उदाहरण यदि प्रक्षिप्त है तो भी तथा कुछ विद्वान् इस पद्य गणित को भास्कराचार्य की ही कृति कहते हैं । ६—कामिन्या हारवत्याः सुरतकलहतो मौक्तिकानां त्रुटित्वा । प्राप्तः षष्ठः सुकेश्या गणक दशमकः संगृहीत प्रियेण ॥ इत्यादि हे गणितज्ञ ! सुरत कलह में किसी कामिनी की मोतीमाला के टूट जाने से उस का १/३ जमीन पर १/५ विस्तर पर और १/६ कामिनी को, १/१० स्वामी ( पतिको और शेष ६ तागे में गुथे रह गये तो मोती संख्या क्या थी ? क्या इस प्रकार के प्रश्नोत्तर लड़की को पढ़ाये या लड़की से पूछे जा सकते हैं । ७—"बाले ! मरालकुल मूल दलानि समतीरे" इत्यादि हे बाले ! किसी सरोवर के हंस समूह का ७/२ क्रीडा की थकावट के शिथिलगमन से सरोवर के तट पर देखा गया, शेष हंसों को जल में क्रीडा कलह करते देखा गया तो हंस कुल का प्रमाण संख्या क्या है ? मूल संख्या का गुणक ७/२ और दृश्य = २, गणित क्रिया से ५६/१६ में + २ गुणकार्थ ७/२ × १/२ = ७/४ का वर्ग ४९/१६ में दृश्य २ का योग ८१/१६ का मूल = ९/४ में गुणकार्थ ७/४ + जोड़ने से १६/४ = ४ का वर्ग = १६ हंस संख्या यही हंस कुल प्रमाण होता है । ८—पुनश्च लड़की से नहीं स्त्री से ही प्रश्न और गणित कौशल सूचक उदाहरण और क्रिया — वर्षा ऋतु के समय हे बाले ! हंस कुल का दश गुणित मूल मानस सर में और उसी का १/८ जल के किनारे से उड़कर स्थल कमलिनी वन में, शेष ३ हंस का जोड़ा ( = ६ ) कोमल कमलनाल सुशोभित जल में क्रीड़ा की लालसा के देखे गये तो हंस संख्या क्या है ? उत्तर १ - १/८ = ७/८ । ६ ÷ ७/८ = ४८/७ = नूतन दृश्य, तथा १० ÷ ७/८ = ८०/७ नया गुणांक, ८०/७ ÷ २ = ४०/७ का वर्ग = १६००/४९ में ४८/७ को जोड़ने से १९३६/४९ का मूल = ४४/७ अतः ४०/७ + ४४/७ = ८४/७ = १२ का वर्ग हंस कुल प्रमाण = १४४ होता है । ९—अपि च स्त्री से सम्बन्धित गणित और उत्तर— अलिकुलदलमूलं मालती यातभृङ्गौ — निखिल नवम भागाश्चालिनीं भृङ्गमेकम् निशिपरिमललुब्धं पद्ममध्ये निरुद्धम् रणति प्रति रणन्तं ब्रूहि कान्ते ! ऽलिसंख्याम् । हे कान्ते ! भ्रमर झुण्ड का १/९ भाग तथा झुण्ड का १/२ के मूल के बराबर मालती पुष्प पर गये, सुगन्धि के प्रलोभन से कमल पुष्प कोश में ग

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