सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयुतमित्यस्योपपत्त्या सिद्धत्वाद्विधुः प्रागृणे फले युक्त Wait, look at "सिद्धत्वाद्विधुः" or "सिद्धत्वाद्बिधुः"? It's 'सिद्धत्वाद्विधुः' or 'सिद्धत्वाद्बिधुः' (both occur, typically विधुः/बिधुः). Look at 'प्रागृणे': 'प्रा' + 'गृ' (or 'गॄ' or 'ग्ऋ')? Look at: 'प्रा' then 'गृ' with ृ: 'प्रागृणे' (prāg-ṛṇe written as prāgṛṇe).
Line 20: इतोऽन्यथोन इत्यस्यासंगतत्वापत्तिश्च । ननु लम्बनरोक्तरीत्यैव स्पष्टग्रहभोगज्ञानार्थं सूत्रा- Wait: "लम्बनरोक्तरीत्यैव" or "लम्बनोक्तरीत्यैव"? Look at line 20: "ल म्ब नो क्त री त्यै व" -> "लम्बनोक्तरीत्यैव"! There is no 'र'. Wait, what about line 28: "अथवा नतलिप्तिकाग्रहे स्वमृणं खलु लम्बनरोक्तवत् ।" Wait, in line 28: "लम्बनरोक्तवत्" or "लम्बनोक्तवत्"? Line