सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछेद्यकाधिकारः १९५ विषुवद्वृत्त का त्रिज्यागोलीय केन्द्र भू केन्द्र है और उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव ये दो पृष्ठीय केन्द्र होते हैं। अपने वृत्तस्थ भ्रमणशील ग्रह का तद्वृत्तीय उच्च स्थान से ग्रह बिम्ब केन्द्र तक जो चाप है उसे भी केन्द्र चाप, उसकी ज्या का नाम केन्द्र ज्या होता है जो पूर्ण में सुस्पष्ट हो गई है। इसलिये कि उच्च बिन्दु से मध्यम ग्रह बिम्ब केन्द्र बिन्दु में नीचोच्चवृत्त का केन्द्र होने से उक्त पदार्थ को केन्द्र शब्द से ही उच्चारित किया जाना गोल परिभाषा से समीचीन है। ग्रह कक्षा योजन को शीघ्र कर्ण से गुणा कर त्रिज्या से भाग देने से भूगर्भ केन्द्र और भूपृष्ठ केन्द्र का अन्तर चाप पृष्ठीय त्रिज्या तुल्य दूरी पर ग्रह अपनी कक्षा में प्रवहवायु से सञ्चालित होकर घूमता है। योजनात्मक कक्षा × शीघ्रकर्ण उपपत्ति— ───────────────────────────── = फल तुल्य दूरी पर भूव्यासान्तरित त्रिज्या शीघ्र कर्णाग्र में ग्रह अपनी कक्षा में प्रवह वेगेन भ्रमण करता है ॥४१॥४२॥ इदानीं भुजान्तरकर्मोपपत्तिमाह— मध्यमार्कोदयात्प्राक् स्फुटार्कोदयः स्यादृणे तत्फले स्वे यतोऽनन्तरम् । तेन भास्वत्फलोत्थासुजातं क्षयः स्वं फलं युक्तियुक्तं निरुक्तं ग्रहे ॥४३॥ वा० भा०—स्पष्टं स्फुटगतौ व्याख्यातं च ॥४३॥ मरीचिः—ननु स्पष्टग्रहज्ञानाद्भुजान्तरफलसंस्कारो ग्रहे व्यर्थ इत्यतः स्रग्विण्याऽऽह— मध्यमेति । तत्फले सूर्यमन्दफले ऋणे सति । यतः कारणाद्मध्यमार्कोदयकालात्पूर्वं स्फुटार्को- दयकालः स्यात् । धनफले मध्यमार्कोदयानन्तरमुत्तरकाले स्फुटार्कोदयः स्यात् । न्यूनाधि- कयोः पूर्वानुक्रमस्थयोः प्रवहानिलेन पूर्वापरकालयोरुदयसम्भवात् । तेन कारणेन सूर्यमन्द- फलकलोत्पन्नासुजनितं फलं भुजान्तराख्यं क्षयः स्वं क्रमेणर्णं धनम् । युक्तियुक्तमुपपत्ति- सिद्धम् । निरुक्तं भानोः फलं गुणितमर्कयुतस्य राशेरित्यादिना स्पष्टाधिकार उक्तम् । तथा च स्पष्टग्रहसिद्ध्यर्थं न भुजान्तरफलसंस्कारः किंतूद्यान्तरसंस्कारेण ग्रहस्य स्वनिर्क्षे मध्यमार्कोदयकालिकत्वसिद्धेः स्पष्टार्कोदयकालिकत्वसिद्ध्यर्थं भुजान्तरफलसंस्कार इति भावः ॥४३॥ केदारदत्तः—भुजान्तर संस्कार बताया जा रहा है— पूर्व में स्फुटरव्युदय धन फल में मध्यम सूर्योदय के अनन्तर स्पष्ट रवि का उदय