भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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गोलबन्धाधिकारः २३७ सूर्य बिम्ब केन्द्र से ६ राशि की दूरी पर सूर्य प्रकाश से प्रकाशित विपरीत दिशा में पृथ्वी की छाया चलती है। तथा मेषादि से विलोम गति से क्रान्तिपात का भ्रमण होता है। इस प्रकार सभी ग्रहों के विमण्डल क्रान्तिवृत्त सम्पात भी विलोम गति से मेष से विलोम, मीन कुम्भादि क्रम से चलते हैं ।।११।। इदानीं क्रान्तिवृत्तस्य निवेशमाह— क्रान्तिपाते च पाताद्भूषट्कान्तरे नाडिकावृत्तलग्नं विदध्यादिदम् । पाततः प्राक् त्रिभे सिद्धभागैरुदग्दक्षिणे तैश्च भागैर्विभागेऽपरे ।।१२।। वा० भा०—क्रान्तिपातचिह्नात् षड्भेऽन्तरेऽन्यच्चिह्नं कार्यम् । ते चिह्ने नाडी- वृत्तेन संसक्ते कृत्वा पातचिह्नादग्रतस्त्रिभेऽन्तरे नाडीवृत्ताद्भागचतुर्विंशत्योत्तरतो यथा भवत्यपरविभागे त्रिभेऽन्तरे दक्षिणतश्च तैर्भागैर्यथा भवति तथा बध