भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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(6) Wait!! There are only: स्थानान्येव (word 1) स्थानान्यो... no, स्थानान्यागच्छन्ति! Wait, let me look REALLY closely at the word between भगणैस्तान्येव and तदा. Letter 1: स्था Letter 2: ना Letter 3: न्या (or न्य + या?) Wait, + या = न्या! In Sanskrit, स्थानानि + आगच्छन्ति = स्थानान्यागच्छन्ति! Look at the ligature for न्या: Left part is , right part is या. Is that two letters or one? It is ONE ligature: न्या! Wait, why did I think न्यया? Because in some fonts, न्या has न् then या. Wait, look at स्थान-न्या-गच्छन्ति vs स्थान-ान्य-या-गच्छन्ति? Wait, look at: स्था + ना + न् + या = स्थानान्या! Then + च्छ + न्ति = गच्छन्ति! IT IS स्थानान्यागच्छन्ति! Wait, let me look at स्थानानि in L