सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८ ) कोण से भूमि आधार पर लम्ब गिराने से अ ब क त्रिभुज में अ क = कर्ण = भूमि, ब क और अ ब = भुज तथा कोटि । अतः लीलावती से २० + १५ = ३५ योग तथा अन्तर = ५ — ३५ × ५ / २५ = ७, २५ ± ७ / २ = ३२ / २, १८ / २ = १६ बड़ी आबाधा और २५ - ७ / २ = १८ / २ = ९ = लघु आबाधा । √भु² - आबाधा² = लम्ब = (१५)² - (९)² = २२५ - ८१ = १४४ का मूल = १२ = लम्ब अथवा (२०)² - (१६)² = १४४ का मूल = १२ यह भी पूर्ण तया लम्बमान होता है । भूमि × लम्ब / २ = १२ × ९ / २ + १२ × १६ / २ = ५४ + ९६ = १५० = दोनों प्रकार से एक रूप का उत्तर में क्षेत्रफल आता है । प्रकारान्तर से भी चतुर्भुज के रूप में क्षेत्र रचना निम्न भांति होती है । [चित्र: २०, १५, १५, १५, ५, ५, ५, ५, २०, २०, १५] कल्पना किया कर्णमान = य कोटि = २० भुज = १५ अन्तर = ५ अन्तर वर्ग = (५)² = २५