सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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त (– – u) then गुरु (–): Let's check the metre: सा (–) म्या (–) द (u) = त-गण सत् (–) त (u)? But 'तः' is –. If it is "असत्ततः": अ (u) सत् (–) त (u) तः (–) -> that's 4 syllables! But we only need 4 syllables: सा (–) म्या (–) द (u) [त-गण] सत् (–) त (–? no) तः (–) Wait, the ending of Śārdūlavikrīḍita is: त-गण (– – u) + गुरु (–). That is 3 + 1 = 4 syllables! Let's count from the break: The caesura is at 12 syllables (सूर्याश्वैः = 12 and 7):
- दृ (–)
- श्याः (–)
- स्युर् (–)
- यु (u)
- ग (u)
- पच् (–)
- च (u)
- रो (–)
- द (u)
- य (u)
- घ (u) -> wait, घ is laghu, टी is guru: u –! Wait! "घटी" has घ (u) टी (–)! Let's