सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ४३ ) मलकवत् गोल ज्ञान होने पर ग्रहगणित साधन की युक्तियों के लिए गणित का मूल स्रोत ज्ञान होने के लिये गोलाध्याय नामक ग्रन्थ रचना में आचार्य प्रवृत्त हुआ— वासनावगतिर्गोलानभिक्षस्य न जायते । व्याख्याता प्रथमं तेन गोले या विष्मोक्त्यः ॥ अर्थात् बिना गोलज्ञान के ग्रहगणित की उपपत्ति का बोध होना सम्भव नहीं है, इसीलिए प्रथम में गोलाध्याय की रचना की गयी है, इत्यादि । ग्रहगणिताध्याय के प्रथम अध्याय में आचार्य भास्कर ने सुजन गणितज्ञों की प्रार्थना के साथ दुर्जनों (वञ्चकों) के लिए भी यह ग्रन्थ सन्तोषप्रद है कहते हुये दुर्गम गणित शास्त्र ज्ञान से रहित नामधारी ज्योतिषियों के लिए बड़े मजे का व्यङ्ग्य किया है— तुष्यन्तु सुजना बुद्ध्वा विशेषान् मदुदीरितान् । अबोधेन हसन्तो मां तोषमेष्यन्ति दुर्जनाः ॥ अर्थात् विद्वान ग्रहगोलज्ञ तो मेरी इन ग्रन्थ रचनाओं में सविशेष बुद्धिवर्धक चम- त्कारिक विषयों को समझकर अत्यन्त प्रसन्न होंगे । किन्तु दुर्जन ज्योतिष समाज मेरे सविशेष ग्रन्थ गहन गिषयों को नहीं समझकर (अपने अबोध से मेरी कथन शैली को नहीं समझकर) मुझे ही दोष देते हुये अपने अबोध से मेरा उपहास कर स्वयं प्रसन्न होंगे । अर्थात् मेरी कृतियाँ सुजनों और दुर्जनों दोनों के लिए सन्तोषप्रद और हास्यप्रद होने से उभयपक्ष को सन्तोषकर हैं किसी को कष्टप्रद नहीं है । ग्रहगोलाध्याय के गोलप्रशंसाध्याय में सिद्धान्त ग्रन्थ लक्षण और उस सिद्धान्त की प्रशंसा की गई है । ग्रहगणिताध्याय में ब्रह्मगुप्ताचार्य, वराहमिहिराचार्य और अपने गुरु (श्री महेश्वर) आदि की स्तुति के साथ उनको ग्रन्थ रचनाओं के उल्लेख के साथ उन्हीं की कृतियों के आधार पर मैंने (आचार्य) "अनेक कठिन गणितों का शोधपूर्ण जो हल किया है उससे उनके साथ सुजन गणितज्ञों से मेरी (आचार्य) कृति भी समादरणीय होगी" इत्यादि आचार्य ने कहा है । गोलप्रशंसाध्याय में आचार्य ने गोलज्ञान की सर्वोच्चता बताते हुए कहा है कि सर्व- रस युक्त भोजन की सत्ता के बावजूद घृतरहित नीरस भोजन की तरह, राजारहित प्रशस्त राज्य की नीरसता की तरह, सुन्दर सभ्य सभा में सुवक्ता के अभाव की नीरस सभा की तरह ही गोल गणितज्ञान से रहित मात्र फलित ज्यातिष का उपयोग करने वाले ज्योतिषी उपहास के पात्र हो जाते हैं । घोड़े आदि से विभूषित राजा की सेना में गर्जनशील हाथियों से रहित सेना की तरह, सुन्दर उत्तम उद्यान .आम्रवृक्षों के अभाव से शोभाहीन बगीचे की तरह, जलरहित सुन्दर