सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयन्त्राध्यायः ४१५ अथ प्रतिज्ञातयन्त्राणां न्यूनाधिकत्वव्यवच्छेदार्थमुद्देशमुद्गीत्याऽऽह—गोलो नाडीवलय- मिति । यन्त्रमिति प्रत्येकमन्वयः । नाडीवलयमित्येकम् । घटोचक्रमिति यन्त्रद्वयनेकम् । एवं फलकान्तं नव यन्त्राणि । एकं बुद्धियन्त्रम् । एकमिति पृथगुद्देशेन प्रागुद्दिष्टयन्त्रेभ्यो- ऽभ्यर्हितत्वं सूचितम् । कुत इत्यतस्तद्विशेषणमाह—पारमार्थिकमिति । अन्यानि पूर्वोक्तानि यन्त्राण्यनुकल्परूपाण्यवास्तवानि बुद्धिस्तु नानुकल्परूपा स्वयमेव वस्तुभूता यन्त्रम् । उत्कृष्टार्थबोधकमिति वा तया चाभ्यर्हितत्वं सहजतः सिद्धमिति भावः । एनेन कतिचिदि- ह्यत्र तानि कियन्तोत्युपस्थितप्रश्नस्य निरासः सूचितः ॥२॥ केदारदत्तः—ब्रह्मांडगत सौर मण्डल की कतिपय वस्तु विशेष की यथार्थ उपलब्धि कराने वाली मानव बुद्धि द्वारा निर्मित पदार्थ का नाम यन्त्र है— स्थूल और सूक्ष्म भेद से भी समय की आनन्त्योन्मुखी गति का ज्ञान करना संभव नहीं है । महान् काल ब्रह्मा का, आदि और अन्त कहाँ से कहाँ तक, यह कहना असम्भव नहीं तो अति कठिन अवश्य है । "बुद्धिरेव बीजमिति" यथा शक्ति बुद्धिगम्य विषयों पर प्राग्कालीन महामनीषी ब्रह्मर्षियों ने प्रकाश दिया है । प्रकाश नामक एक भौतिक पदार्थ भी गमनशील है । वह भी कालाधीन है या काल ही प्रकाश का कारण है या प्रकाश का विस्तार ही काल है इत्यादि खगोल त्रिश्यों की गतिविधि समझने के लिये तादृश या तादृक् भौतिक उपकरणों से मानव द्वारा आज तक निरन्तर प्रयत्न होता आ रहा है, इस विशाल वस्तुस्थिति के ज्ञान के लिये इन भौतिक साधनों को 'यन्त्र' कहा जाना चाहिए और कहा भी जा रहा है । आकाशस्थ ग्रह पिण्डों द्वारा समय ज्ञान के लिये यहाँ पर आचार्य कुछ प्रसिद्ध यन्त्रों के उपयोग द्वारा सूक्ष्माति सूक्ष्म दिनगत काल के अवयवों के ज्ञान के लिये यन्त्रों द्वारा इस अध्याय का आरम्भ कर रहे हैं कि आधुनिक युग में घण्टा मिनिट सेकण्ड ˙˙˙˙ -सूचक घटी यन्त्र सर्वत्र सुलभ है । यन्त्रों के बिना दिनगत काल के सूक्ष्माति सूक्ष्म अवयवों का ज्ञान नहीं होता है, अत एव संक्षेप से समय सूचक कतिपय यन्त्रों का वर्णन इस यन्त्राध्याय नाम के अध्याय में किया जा रहा है । इस प्रकार यन्त्रों में (१) गोलयन्त्र (२) नाडीवलय (३) यष्टि (४) शङ्कु, (५) घटी, (६) चक्र, (७) चाप, (८) तुर्य और (९) फलक यन्त्रों के वर्णन के साथ सर्वोपरि सर्वोत्तम एक यन्त्र है जिसका नाम “धी” अर्थात् बुद्धि यन्त्र है । वह जो आध्यात्मिक विषय है वही सर्वोपरि सर्वत्र गमनशील एक सर्वज्ञता बोधक पारमार्थिक “धी” यन्त्र है ॥१॥२॥