भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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Wait, "सिद्धयर्थम्": look at "द्धय": 'द्ध' + 'य'. Yes, "सिद्धयर्थम्". "रविचिह्नस्य च्छाया पतति कुमध्ये यथा तथा विधृते उडुगोले इत्युक्तम् ।" All clear!

Line 9: "अन्यथा सूर्यबिम्बक्रान्तिवृत्तस्यार्कचिह्नयोरूर्ध्वाधरान्तरसत्त्वेऽप्यभिन्नदृङ्मण्डलानुकारेणा-" Wait, look at "दृङ्मण्डलानुकारेणा-": "दृ" + "ङ्म" (ङ with म underneath, or ङ् + म) + "ण्डलानुकारेणा-". In Unicode: दृङ्मण्डलानुकारेणा- (दृ + ङ् + म + ण्डलानुकारेणा-). Clear!

Line 10: "वस्थानोपपत्तेः । तदा विषुवद्वृत्तस्थचिह्नस्याप्यर्कचिह्नानुरोधेन भ्रमणाद्विषुवद्वृत्ते" All clear!

Line 11: "कुजबिन्दोरन्तरालघट्यो दिनघट्य इति सम्यगुक्तम् । दृष्टान्तगोले भूगर्भक्षितिजवृत्तनिब-" All clear!

Line 12: "न्धनादुक्तदिशा भूगर्भसूर्योदयाद्गतघट्यो न भूपृष्ठसूर्योदयोदितो दृष्टान्तगोले निबद्धक्षिति-" Wait, "भूप

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