सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअन्यथैकस्य:
Is it अन्यथैकस्य?
Let's read the letters:
अ (a) न्य (nya) थै (thai) क (ka) स्य (sya) ?
Wait, what is between क and स्य?
Wait, is it त्य? अन्यथैकत्यस्य? No, that's not a word.
Wait, could it be अन्यथैतस्य?
Let's look at the letter: क? No, it's क with something?
Wait, look at line 17: आचार्यैरेकेति प्रयुक्तम् ("एका" इति प्रयुक्तम्).
"एका" was used by the Acharya ("पट्टिकैका").
If the original text was "पट्टिकैकाशीत्यङ्गुला", then "एकाशीति" was read as "एका षष्टिः" by taking "एका" and changing "शीति" to "षष्टि"!
"तेनैवाल्पबुद्धिना पट्टिकैकाशीत्यङ्गुलेत्यत्रैका(रशब्दलोपात्)शीत्यमित्यस्य स्थाने षष्ट्यमित्यस्य ग्रहणाच्च शोधितत्वादन्यथैकशब्दस्य विवरणानुक्त्यनुपपत्तेः" ??
Wait! Look at (शब्दलोपात्):