सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्तनाल्लम्बवृत्तसंपातादूर्ध्वं वृत्ते नतघटिका गण्याः।"
Does it say anything about "द्वे"?
No! "लम्बवृत्तसंपातात् ऊर्ध्वं वृत्ते नतघटिका गण्याः।"
"लम्बाद् धेया विनतघटिकाः" = लम्बात् (लम्बवृत्तसंपातात्) विनतघटिकाः (नतघटिकाः) धेयाः (गण्याः, स्थापनीयाः)!
"धेया" means "स्थापनीया" (should be placed/counted)!
And then: "व्यस्ता देया भवति च तथा या परा तत्र मौर्वी ॥"
See? "धेया" in line 1 corresponds to "देया" in line 2!
"धेया" ... "देया"!
What an incredible confirmation! "धेया" and "देया"!
So it is definitely धे या (धेया)! The typesetter put a slight gap between द् and धे, or it's लम्बाद् धे या. Let's write लम्बाद् धे या.
Line 29: व्यस्ता देया भवति च तथा या परा तत्र मौर्वी ॥
Line 30: धार्या पट्टी स्पृशति हि यथा तज्ज्यकां यष्टिचिह्नं । Wait, "त