भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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or ङ्ग; clearly त्र्यङ्गद्रिभिः).

Line 26: ग्निभि ३९४४७९३७५ विभज्य शेषमहर्गणो जातः खखाभ्रदिक्संमितः १००००। Wait: "ग्निभि" - is there a visarga? Look at line 26: "ग्निभि ३९४४७९३७५" - no visarga on 'ग्निभि' or is there? It just says 'ग्निभि ३९४४७९३७५'. Then: "विभज्य शेषमहर्गणो जातः खखाभ्रदिक्संमितः १००००।" Let's check the number: ख (0) ख (0) अभ्र (0) दिक् (10) = 10000! Exactly १००००!

Line 27: जातः कुजदिने। द्विगुणे हरे क्षिप्ते जातः सोमवारसे ७८८९६८७५०। त्रिगुणे Wait, look at: "सोमवारसे" or "सोमवासरे"? Look at the letters: स ो म व ा स र े or स ो म व ा र स े? Look closely at line 27: "सोमवासरे" or "सोमवारसे"? Wait! It has: स (sa) ो (o) म (ma) व (va) ा (aa