भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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Wait, line 30: "खखाभ्रगगनप्राणर्तुभूभिर्हृतं शुध्येच्चेन्न खिलं फलमित्युक्तं" Let's check the numbers: ख (0) ख (0) अभ्र (0) गगन (0) प्राण (5) ऋतु (6) भू (1) -> 1650000! "भूभिर्हृतं शुध्येच्चेन्न खिलं फलमित्युक्तं"

Line : "व्यर्थं तथाऽप्युक्तभगणकु दिनशेषभगणशेषस्यानपवर्तितस्य ज्ञाने कुट्टकार्थं भगणकुदिनयो-" Wait, "भगणकु दिनशेषभगणशेषस्य"? Look at line 31: "तथाऽप्युक्तभगणकुदिनशेष..." or "भगणकुदिनयोर्भगणशेषस्य"? Let's read closely: "तथाऽप्युक्तभगणकु" then space? "दिनशेषभगणशेषस्यानपवर्तितस्य" -> wait, does it say "कुदिनशेष"? No, "कुदिन" then "ज" or "यो"? Wait, look at: "तथाऽप्युक्तभगणकु" then newline? No, same line: "तथाऽप्युक्तभगणकुदिनजभगणशेषस्यानपवर्तितस्य"? Look at the letters between 'कु' and 'भगणशेषस्य': 'दि