सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७२ ) खाद्य नामक करण ग्रन्थ की रचना की थी । ब्रह्मगुप्त के पौत्र एवं विष्णुगुप्त के पुत्र होने के कारण वैश्य जाति के समझे जाते हैं । भास्कराचार्य के 'ब्रह्माह्वयश्रीधरपद्मनाभ बीजानि यस्मादति विस्तृतानि' से ज्ञात होता हैं कि ब्रह्मगुप्त का भी कोई बीजगणित नाम का ग्रन्थ था । जिसका इङ्गलिश अनुवाद ईसवी १८१७ में कोलब्रुक साहब ने किया है। इसी प्रकार ब्रह्मगुप्त के ब्राह्मस्फुट सिद्धान्त के १२ वें अध्याय, ब्रह्मगुप्त के व्यक्त अंकगणित और भास्कराचार्य की पाटी अंकगणित एवं बीजगणित का अंग्रेजी अनुवाद भी उपलब्ध हैं । भास्कराचार्य ने अपने सिद्धान्त शिरोमणि के प्रारम्भ में लिखा है— “कृती जयति जिष्णुजो गणकचक्रचूडामणि- र्जयन्ति ललितोक्तयः प्रथिततन्त्रसद्युक्तयः । वराहमिहिरादयः समवलोक्य एषां कृतीः कृती भवतो मादृशोऽप्यतनु तन्त्रबन्धोऽवधीः ॥” इस प्रकार भास्कराचार्य ने गणकचक्रचूडामणि शब्द से ब्रह्मगुप्त के साथ आचार्य वराह की भी स्तुति की है । ब्रह्मगुप्त के ब्राह्मस्फुट सिद्धान्त पर चतुर्वेदाचार्य पृथूदक स्वामी की वासनाभाष्य नाम की टीका प्रसिद्ध है । ब्रह्मगुप्त स्वयम् नलिकावेध से ग्रह- गणित को प्रामाणिक मानते हैं । उदाहरणार्थ निम्न श्लोक इस बात का स्पष्टीकरण है— “ब्रह्मोक्तं ग्रहगणितं महत्ता कालेन यत्खिलीभूतम्, अभिधीयते स्फुटं तज्जिष्णुसुतब्रह्मगुप्तेन । संसाध्य स्पष्टतरं बीजं नलिकादियन्त्रेण, तत्संस्कृतग्रहेभ्यः कर्त्तव्यो निर्णयादेशौ ॥” निःसन्देह यह कहा जा सकता है कि अपने समय से आज तक के गणिताचार्यों में आचार्य ब्रह्मगुप्त गणित गोल धरातल में ऐतिहासिक खगोलज्ञ हुए हैं। मुञ्जाल का लघुमानस करण श्री मुञ्जाल ने शक ५८४ (ई० सन् ६६२) में 'लघुमानस' नामक करण ग्रन्थ की रचना की । प्रस्तुत ग्रन्थ में ग्रहों के ध्रुवक साधन कर वहाँ से इष्ट समय तक का अहर्गण से साधित ग्रह में ध्रुवक संस्कार से इष्टदिन के ग्रहों का संसाधन किया है । भास्कराचार्य ने अपने “सिद्धान्तशिरोमणि” में अयन चलन के सन्दर्भ में 'मुञ्जाल' का उल्लेख किया है— “अयन चलनं यदुक्तं मुञ्जालाद्यैः स एवायम् ।” मुञ्जाल के मत से ४३४ शक में, अयनांश का अभाव ज्ञात होता है ।