सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७४ ) "मुनिश्रेष्ठ शाण्डिल्य गोत्रावतंस, कुम्भोद्भवालङ्कृत, दिगङ्गनाओं का भूषणसर्वस्व, सह्यकुलाचलाश्रित विज्जडविड नगर निवासी पवित्रितदण्डकारण्य, अनेक यज्ञाजित पुण्य श्लोक, याज्ञिकों का अग्रणी, यजुः शाखियों का उपाध्याय, सांवत्सरिकों का आचार्य, काव्यनाटकालंकार वेत्ताओं का अध्यापयिता, श्रीवृद्धिद का उपायकारक, ब्रह्मवसिष्ठ गणित तुल्य सर्वतोभद्रादि यन्त्र निर्माता, महाराष्ट्रीयों का आश्रयदाता, महेश्वराचार्य का नन्दन (पुत्र) परमकारुणिक, श्रीधर ब्रह्मगुप्त, लल्ल, चतुर्वेदाचार्य निर्मित अपार गणितसागर-सार विचार से परिपूर्ण श्री भास्कराचार्य सिद्धान्त शिरोमणि ग्रन्थारम्भ कर रहे हैं ।'' इत्यादि से आचार्य भास्कर की स्तुति की गई है । वस्तुतः लीलावती में चतुर्भुज क्षेत्र गणित का नियतत्व, वृत्त पृष्ठ घनफल साधन श्रेढ़ी गणित में गुणोत्तर श्रेढ़ी का सर्वफल साधन, एकाद्वित्र्यादि मूषावहन, अंकपाश गणित, बीजगणित में अवगद्धि का मूल्यज्ञापन, योगात्तरादि साधन, कुट्टक वर्गप्रकृति जैसे अलौकिक गणितज्ञान, एकवर्ण समीकरण में प्रश्नसाधन की अद्भुत कल्पना, अनेक वर्ण समीकरण में कल्पना लाघव, वर्ण समीकरण में दो प्रकार का मान साधन, पद्मनाभादि बीजगणित में दोष दर्शन, भावित गणित में चमत्कार