भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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पृष्ठ 444
४१४सिद्धान्तलेशसंग्रह[ द्वितीय परिच्छेद

तस्मात् प्रपञ्चमिथ्यात्वात् पराभेदाच्च देहिनः ।
मानान्तराविरोधेन सिद्धोऽद्वैते समन्वयः ॥६८॥

इससे प्रपञ्चके मिथ्या होनेसे, परमात्माके साथ जीवका अभेद होनेसे और अन्य किसी प्रमाणके साथ विरोध न होनेसे अद्वैत ब्रह्ममें वेदान्तोंका समन्वय सिद्ध ही है ॥६८॥

इति श्रीमद्गङ्गाधरसरस्वतीविरचितायां वेदान्तसिद्धान्तसूक्तिमञ्जर्यां
द्वितीयः परिच्छेदः समाप्तः ।

तस्मादचेतनस्य प्रपञ्चस्य मिथ्यात्वात् चेतनप्रपञ्चस्य ब्रह्माभेदाच्च न वेदान्तानामद्वितीये ब्रह्मणि विद्यैकप्राप्ये समन्वयस्य कश्चिद्विरोध इति ॥

इति सिद्धान्तलेशसंग्रहे द्वितीयः परिच्छेदः समाप्तः ।


इससे अचेतन प्रपञ्चके मिथ्या होनेसे और चेतनप्रपञ्चका ब्रह्मके साथ अभेद होनेसे केवल विद्यासे प्राप्य अद्वितीय ब्रह्ममें वेदान्तोंका तात्पर्य है, इसमें कोई विरोध नहीं है ।

इति पं० मूलशङ्करव्यासविरचित सिद्धान्तलेशसंग्रहके भाषानुवादमें
द्वितीय परिच्छेद समाप्त

ankurnagpal108@gmail.com