भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

पृष्ठ 477, कुल 590 में से

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पृष्ठ 477

क्षत्रिय और वैश्यका श्रवण आदिमें अधिकार ] भाषानुवादसहित ४४७


अत्र केचित्—'यदि वेतरथा ब्रह्मचर्यादेव प्रव्रजेद्, गृहाद्वा, वनाद्वा' इत्याद्यविशेषश्रुत्या,

'ब्राह्मणः क्षत्रियो वाऽपि वैश्यो वा प्रव्रजेद् गृहात् ।
त्रयाणामपि वर्णानाममी चत्वार आश्रमाः॥'

इति स्मृत्यनुगृहीततया क्षत्रियवैश्ययोरपि सन्न्यासाधिकारसिद्धेः श्रुत्यन्तरेषु ब्राह्मणग्रहणं त्रयाणामुपलक्षणम् ; अत एव वार्त्तिकेऽपि 'अधिकारिविशेषस्य' इति श्लोकेन भाष्याभिप्रायमुक्त्वा—

'त्रयाणामविशेषेण सन्न्यासः श्रूयते श्रुतौ ।
यदोपलक्षणार्थं स्यात् ब्राह्मणग्रहणं तदा ॥'

इत्यनन्तरश्लोकेन स्वमते क्षत्रियवैश्ययोरपि सन्न्यासाधिकारो दर्शित इति तयोः श्रवणाद्यनुष्ठानसिद्धिं समर्थयन्ते ।

अन्ये तु ब्राह्मणस्यैव सन्न्यासो बहुधा श्रुतेः ।
देवादिवदसन्न्यासश्रवणं क्षत्रवैश्ययोः ॥ १२ ॥

कुछ लोग कहते हैं कि अनेक श्रुतियोंसे संन्यास केवल ब्राह्मणके लिए है, क्षत्रिय और वैश्यको देवादिके समान संन्यासके बिना श्रवण है ॥ १२ ॥


इस आक्षेपके समाधानमें कोई लोग कहते है कि 'यदि वेतरथा०' (यदि ब्रह्मचर्य अवस्थामें ही वैराग्य उत्पन्न हुआ, तो ब्रह्मचर्यावस्थासे ही संन्यासका परिग्रहण करना चाहिए अथवा गृहस्थाश्रमसे या वानप्रस्थसे संन्यास लेना चाहिए) इस श्रुतिसे,

'ब्राह्मणः क्षत्रियो वाऽपि०' (ब्राह्मण, क्षत्रिय अथवा वैश्य गृहस्थाश्रमसे संन्यासी हो सकते हैं, क्योंकि तीनों वर्णोंके लिए ये चार आश्रम हैं) इस स्मृतिके अनुगृहीत रूपसे, क्षत्रिय और वैश्यका भी संन्यासमें अधिकार सिद्ध है, अतः अन्य श्रुतियोंमें ब्राह्मणग्रहण तीनों वर्णोंका उपलक्षण है, इसीलिए वार्त्तिकमें 'अधिकारिविशेषस्य' इत्यादिसे भाष्यके अभिप्रायको कहकर—

'त्रयाणाम्०' (जब कि ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य तीनोंका श्रुतिमें सामान्यरूपसे श्रवण होता है, तब ब्राह्मणशब्द तीनों वर्णोंका उपलक्षण ही है) इस प्रकारके पीछेके श्लोकसे अपने मतमें वार्त्तिककारने क्षत्रिय और वैश्यके भी श्रवण आदिके अनुष्ठानमें अधिकारका समर्थन किया है।

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