सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा
स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)
पृष्ठ 497, कुल 590 में से
संदर्भ में पढ़ें[ ब्रह्मसाक्षात्कारमें करण-विचार ] भाषानुवादसहित ४६७
पासनेनेव निर्गुणोपासनेन जन्यस्य स्वविषयसाक्षात्कारस्य श्रवणादि- प्रणालीजन्यसाक्षात्कारवदेव तत्त्वार्थविषयत्वावश्यंभावाच्च ।
इयांस्तु विशेषः—प्रतिबन्धरहितस्य पुंसः श्रवणादिप्रणाल्या ब्रह्मसा- क्षात्कारो झटिति सिध्यतीति साङ्ख्यमार्गो मुख्यः कल्पः, उपास्त्या तु विलम्बेनेति योगमार्गोऽनुकल्प इति ॥ ८ ॥
ननु किं करणं ब्रह्मसाक्षात्कारे ब्रह्मके साक्षात्कारमें करण क्या है ?
नन्वस्मिन् पक्षद्वयेऽपि ब्रह्मसाक्षात्कारे किं करणम् ? । अत्र केचन ।
प्रत्ययावृत्तिमाहुरग्र्युः साङ्ख्ये योगे च सम्भवात् ॥ १९ ॥
इस विषयमें कुछ लोग कहते हैं कि साङ्ख्य और योग दोनों मार्गमें प्रत्ययावृत्ति ही ब्रह्मके साक्षात्कारमें करण है ॥ १९ ॥
यथार्थ होनेके कारण दहरादि उपासनाके समान निर्गुण उपासनासे जन्य स्वविषयक साक्षात्कार श्रवणादि क्रमसे उत्पन्न साक्षात्कारके समान तत्त्वार्थ- विषयकत्व अवश्य हो सकता है ।
विशेष केवल इतना ही है कि प्रतिबन्धकोंसे शून्य पुरुषको श्रवणादि क्रमसे ही ब्रह्मसाक्षात्कार शीघ्र होता है, इसलिए सांख्यमार्ग मुख्य कल्प है और उपा- सनासे ब्रह्मसाक्षात्कार विलम्बसे होता है, अतः योगमार्ग गौण कल्प है ॥८॥
यहांपर * शङ्का होती है कि इन दो पक्षोंमें भी अर्थात् सांख्यमार्ग और योगमार्गमें भी ब्रह्मसाक्षात्कारमें करण कौन है ?
है, तथापि 'सगुण ईश्वरकी अभिप्रीतये अपनी उपासना करनी चाहिए' इस प्रकारके उपासना- विधिशास्त्रके सामर्थ्यसे सगुण उपासना की जाती है, वैसे ही 'निर्गुण उपासना करनी चाहिए' इस शास्त्रके आधारपर निर्गुण उपासना करनी चाहिए, यह भाव है ।
* यदि शङ्का हो कि यह प्रश्न पक्षद्वयसाधारण नहीं हो सकता है, क्योंकि योगमार्गमें निर्गुण उपासना ही सगुण उपासनाके दृष्टान्तसे पूर्वमें करण कही गई है, तो यह शङ्का युक्त नहीं है, क्योंकि यह प्रश्न प्रमाणके अभिप्रायसे पूछा गया है, पहले निर्गुण उपासनामें ब्रह्म- साक्षात्कारकी हेतुता बतलाई गई है, करणता नहीं, इसलिए इस प्रश्नकी अनुपपत्ति नहीं है, अर्थात् योगमार्गमें उपासना ही करण है, या अन्य कोई यह प्रश्न हो सकता है, यह भाव है ।