भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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पृष्ठ 535

ब्रह्मज्ञानके नाशकका विचार ] भाषानुवादसहित ५०५


न्तरमवश्यं वाच्यम्, निरिन्धनदहनादिध्वंसेऽपि कालादृष्टेश्वरेच्छादिकार- णान्तरमस्तीति वाच्यम्, अतिप्रसङ्गापरिज्ञानात् । न च घटादिध्वंस- स्यापि कारणान्तरनिरपेक्षत्वं स्यादित्यतिप्रसङ्गः, ध्वंसमात्रे कारणान्तर- नैरपेक्ष्यानभिधानात् । न च घटध्वंसदृष्टान्तेन ब्रह्मज्ञानध्वंसस्य कारणान्तरा- पेक्षासाधनम्, तद्दृष्टान्तेन मुद्गरपतनापेक्षाया अपि साधनापत्तेः । नापि ज्ञानध्वंसत्वसाम्याद् घटज्ञानादिध्वंसस्यापि कारणान्तरनैरपेक्ष्यं स्यादित्य- तिप्रसङ्गः, सेन्धनानलध्वंसस्य जलसेकाद्यदृष्टकारणापेक्षत्वेऽपि निरि- न्धनानलध्वंसस्य तदनपेक्षत्ववद्, जाग्रज्ज्ञानध्वंसस्य विरोधिविशेषगुणा-


ध्वंसको केवल प्रतियोगिजन्य माना जायगा, तो अतिप्रसङ्ग होगा, इसलिए उसके प्रति अवश्य कारणान्तर भी मानना चाहिए, और निरिन्धन दहन आदिके ध्वंसमें भी काल, अदृष्ट, ईश्वर आदि अन्य कारण हैं ही, तो यह भी युक्त नहीं है, क्योंकि अतिप्रसङ्गोंका † परिज्ञान हो ही नहीं सकता है । यदि कहें कि घट आदिके ध्वंसको भी कारणान्तरनिरपेक्षत्व प्रसक्त होगा, यही अतिप्रसङ्ग है, तो यह भी अयुक्त है, क्योंकि हम सम्पूर्ण ध्वंसके प्रति कारणान्तरकी निरपेक्षता नहीं कहते हैं, और यदि घटध्वंसके दृष्टान्तसे ब्रह्मज्ञानध्वंसको कारणान्तरकी अपेक्षा मानें, तो उसी घटध्वंसके दृष्टान्तसे मुद्गरपातकी अपेक्षाका भी साधन प्रसक्त होगा । और ज्ञानध्वंसत्वके दृष्टान्तसे घटज्ञानध्वंसके प्रति भी अन्य कारणकी निरपेक्षता प्रसक्त होगी, इस प्रकार भी अतिप्रसङ्ग नहीं दे सकते हैं, क्योंकि जैसे इन्धनसे युक्त वह्निके ध्वंसके प्रति जलसिञ्चन आदि अन्य कारणकी अपेक्षा होनेपर भी इन्धनरहित अग्निध्वंसके प्रति कारणान्तरकी आवश्यकता नहीं होती है और जैसे जाग्रत्कालीन ज्ञानध्वंसोंके प्रति विरोधी अन्य विशेष


† यदि कोई शङ्का करे कि अतिप्रसङ्गोंका परिज्ञान क्यों नहीं होता है, तो इसपर कहना चाहिये कि ब्रह्मज्ञानका ध्वंस यदि प्रतियोगीसे अतिरिक्त कारणसे जन्य न हो, तो घटादिध्वंस भी, प्रतियोगीसे अतिरिक्त कारणसापेक्ष नहीं होगा, इस प्रकारका अतिप्रसङ्ग है अथवा घटादिध्वंसके समान ब्रह्मज्ञानका ध्वंस भी प्रतियोगीसे अतिरिक्त कारणसे सापेक्ष होगा, यह अतिप्रसङ्ग है अथवा ब्रह्मज्ञानके ध्वंसके समान घटादिज्ञानका ध्वंस भी कारणान्तरसे निरपेक्ष होगा यह अतिप्रसङ्ग है अथवा ब्रह्मज्ञानका अपनी उत्पत्तिके द्वितीय क्षणमें नाश होगा, यह अतिप्रसङ्ग है, इनमें से प्रत्येकका अग्रिम ग्रन्थसे खण्डन किया गया है ।

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