भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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पृष्ठ 539

[ ब्रह्मज्ञानके नाशकका विचार ] भाषानुवादसहित ५०९


मुन्मूलयन्नखण्डचैतन्यप्रकाशस्तन्निवर्तनेऽपि प्रकल्पते इति न तन्नाशे काचिदनुपपत्तिरित्याहुः ।

उपादानक्षयादन्ये विश्वोच्छेदं प्रचक्षते ।
जीवन्मुक्तस्य भोगोऽत्राविद्यालेशेन युज्यते ॥ ३६ ॥

अन्य लोग कहते हैं कि उपादानके नष्ट होनेसे ही सम्पूर्ण प्रपञ्चका नाश होता है और जीवन्मुक्त पुरुषको अविद्याके लेशसे भोग हो सकता है ॥ ३६ ॥

इति श्रीगङ्गाधरसरस्वतीविरचितवेदान्तसिद्धान्तसूक्तिमञ्जर्यां
तृतीयः परिच्छेदः ।

अन्ये तु ब्रह्मज्ञानमज्ञानस्यैव निवर्तकम्, ज्ञानाज्ञानयोरेव साक्षाद्विरोधात् । प्रपञ्चस्य तूपादाननाशान्नाश इति प्रपञ्चान्तर्गतस्य ब्रह्मज्ञानस्यापि तत एव नाशः । न च प्रपञ्चस्य ज्ञानानिवर्त्यत्वे मिथ्यात्वानुपपत्तिः । प्रपञ्चनिवृत्तेस्साक्षाद् ज्ञानजन्यत्वाभावेऽपि ज्ञानजन्याज्ञाननाशजन्यत्वात् । 'साक्षात् परम्परया वा ज्ञानैकनिवर्त्यत्वं मिथ्यात्वम्' इत्यङ्गीकारात् । एवं च तत्त्वसाक्षात्कारोदयेऽपि जीवन्मुक्तस्य देहादिप्रतिभास उपपद्यते । प्रारब्धकर्मणा प्रतिबन्धेन तत्त्वसाक्षात्कारोदयेऽपि प्रारब्धकर्मतत्कार्यदेहादि-


कर सम्पूर्ण प्रपञ्चका उच्छेद करता हुआ चैतन्यात्मक प्रकाश चरमवृत्तिके विनाश करनेमें भी समर्थ होता है, इसलिए उसके विनाशमें कोई अनुपपत्ति नहीं है ।

अन्य कुछ लोग कहते हैं कि ब्रह्मज्ञान अज्ञानका ही निवर्तक है । क्योंकि ज्ञान और अज्ञानका साक्षात् विरोध है, प्रपञ्चका तो उपादानके नाशसे नाश होता है, इसलिए प्रपञ्चके अन्तर्गत ब्रह्मज्ञानका भी उपादानके नाशसे नाश होता है । यदि शङ्का हो कि प्रपञ्चकी निवृत्ति ज्ञानसे न मानी जाय, तो मिथ्यात्वकी अनुपपत्ति होगी, तो यह भी युक्त नहीं है, क्योंकि प्रपञ्चनिवृत्ति यद्यपि साक्षात् ज्ञानजन्य नहीं है, तथापि ज्ञानजन्य अज्ञान नाशसे जन्य है, अतः मिथ्यात्वकी उपपत्ति हो सकती है, क्योंकि साक्षात् अथवा परम्परया केवल ज्ञाननिवर्त्यत्वको मिथ्यात्वका अङ्गीकार किया जाता है, एवञ्च * तत्त्वसाक्षात्कारके उत्पन्न होनेपर भी जीवन्मुक्त पुरुषको