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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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पृष्ठ 58
३०सिद्धान्तलेशसंग्रह[ प्रथम परिच्छेदे

अन्ये परोक्ष एवात्मज्ञाने नियममास्थिताः ।
मनसैवेदमाप्तव्यमित्यादिश्रुतिदर्शनात् ॥ ८ ॥

कुछ लोग परोक्ष ज्ञानके उत्पादनमें शब्दकी सामर्थ्य होनेसे 'श्रोतव्यः' को परोक्ष आत्मज्ञानमें ही नियमविधि मानते हैं, क्योंकि 'मनसैवेदमाप्तव्यम्' (यह आत्मतत्त्व मनसे ही प्राप्त करने योग्य है) इत्यादि श्रुति देखी जाती है ॥ ८ ॥

वेदान्तश्रवणेन न ब्रह्मसाक्षात्कारः, किन्तु मनसैव, 'मनसैवानुद्रष्टव्यम्' इति श्रुतेः । 'शास्त्राचार्योपदेशशमदमादिसंस्कृतं मन आत्मदर्शने करणम्' इति गीताभाष्यवचनाच्च । श्रवणं तु निर्विचिकित्सपरोक्षज्ञानार्थमिति तादर्थ्येनैव नियमविधिरिति केचित् ।


वेदान्तके श्रवणसे ब्रह्मसाक्षात्कार नहीं होता, किन्तु अन्तःकरणसे ही होता है, क्योंकि 'मनसैवानुद्रष्टव्यम्' (मनसे ही साक्षात्कार करना चाहिए) इस प्रकारकी श्रुति है, और 'शास्त्राचार्योपदेशशमदमादिसंस्कृतं०' ('तत्त्वमसि' आदि शास्त्र *, आचार्यका उपदेश, शम, दम, तितिक्षा आदिसे शुद्ध हुआ मन ही आत्माके अपरोक्षानुभवमें करण है) ऐसा श्रीमद्भगवद्गीताके भाष्यमें वचन भी है। श्रवणका फल तो निश्चयात्मक परोक्षज्ञान ही है, इसलिए निश्चयात्मक शब्दजन्य परोक्षज्ञानरूप प्रयोजनके लिए श्रवणकी नियमविधि है, इस प्रकार कोई लोग कहते हैं † ।


स्वभाव है, यह बात नहीं है। इसीलिए ज्ञानमें रहनेवाला परोक्षत्वधर्म किसी कारणविशेषसे प्राप्त होता है, इसका खण्डन किया जायगा, अतः शाब्दजन्य अपरोक्षज्ञानके प्रति मनन आदिके समान श्रवणकी विधि भी अयुक्त नहीं है, इसलिए एकदेशी, ऐसा कहा गया है।

* आचार्यका उपदेश—आचार्य द्वारा किया गया वाक्यार्थोंका विवरण अर्थात् 'तत्त्वमसि' आदि अद्वैतपरक वाक्योंके अर्थोंका स्पष्ट रीतिसे प्रतिपादन।

† इस मतमें पूर्व मतसे इतना विशेष है कि यहाँ ब्रह्मसाक्षात्कार मानस—मनसे होनेवाला कहा गया है, अतः मनकी सहकारितारूपसे मनन और निदिध्यासनमें विधि है और पूर्व मतमें ब्रह्मसाक्षात्कार शाब्द—शब्दसे होनेवाला कहा गया है, इसलिए शाब्दज्ञानके कारण शब्दकी सहकारितारूपसे मनन और निदिध्यासनमें विधि है।

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