संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १०९. कार्तिकमें तुलसीवृक्षके आरोपण और पूजन आदिकी महिमा | ४१८ | १२९. यमुना और श्रीकृष्णपत्नियोंका संवाद, कीर्तनोत्सवमें उद्धवजीका प्रकट होना | ४६४ |
| ११०. त्रयोदशीसे लेकर दीपावलीतकके उत्सव-कृत्यका वर्णन | ४२१ | १३०. श्रीमद्भागवतका माहात्म्य, भागवतश्रवणसे श्रोताओंको भगवद्धामकी प्राप्ति | ४६७ |
| १११. कार्तिकशुक्ला प्रतिपदा और यमद्वितीयाके कृत्य तथा बहिनके घरमें भोजनका महत्त्व | ४२३ | १३१. श्रीमद्भागवतका स्वरूप, प्रमाण, श्रोता-वक्ताके लक्षण, श्रवणविधि और माहात्म्य | ४७० |
| ११२. आँवलेके वृक्षकी उत्पत्ति और उसका माहात्म्य. | ४२५ | ( वैशाखमास-माहात्म्य ) | |
| ११३. गुणवतीका कार्तिकव्रतके पुण्यसे सत्यभामाके रूपमें अवतार तथा भगवान्के द्वारा शंखासुरका वध और वेदोंका उद्धार | ४२७ | १३२. वैशाखमासकी श्रेष्ठता; उसमें जल, व्यजन, छत्र, पादुका और अन्न आदि दानोंकी महिमा | ४७४ |
| ११४. कार्तिकव्रतके पुण्यदानसे एक राक्षसीका उद्धार.. | ४२९ | १३३. वैशाखमासमें विविध वस्तुओंके दानका महत्त्व तथा वैशाखस्नानके नियम | ४७५ |
| ११५. भक्तिके प्रभावसे विष्णुदास और राजा चोलका भगवान्के पार्षद होना | ४३१ | १३४. वैशाखमासमें छत्रदानसे हेमकान्तका उद्धार | ४७७ |
| ११६. जय-विजयका चरित्र | ४३५ | १३५. महर्षि वसिष्ठके उपदेशसे राजा कीर्तिमान्का अपने राज्यमें वैशाखमासके धर्मका पालन कराना और यमराजका ब्रह्माजीसे राजाके लिये शिकायत करना | ४८० |
| ११७. सांसर्गिक पुण्यसे धनेश्वरका उद्धार, दूसरोंके पुण्य और पापकी आंशिक प्राप्तिके कारण तथा मासोपवासव्रतकी संक्षिप्त विधि | ४३६ | १३६. ब्रह्माजीका यमराजको समझाना और भगवान् विष्णुका उन्हें वैशाखमासमें भाग दिलाना | ४८४ |
| ११८. तुलसी-विवाह और भीष्मपंचक-व्रतकी विधि एवं महिमा | ४३८ | १३७. भगवत्कथाके श्रवण और कीर्तनका महत्त्व तथा वैशाखमासके धर्मोंके अनुष्ठानसे राजा पुरुषशाका संकटसे उद्धार | ४८६ |
| ११९. एकादशीको भगवान्के जगानेकी विधि, कार्तिकव्रतका उद्यापन और अन्तिम तीन तिथियोंकी महिमाके साथ ग्रन्थका उपसंहार | ४४१ | १३८. राजा पुरुषशाको भगवान्का दर्शन, उनके द्वारा भगवत्स्तुति और भगवान्के वरदानसे राजाकी सायुज्य मुक्ति | ४८९ |
| ( मार्गशीर्षमास-माहात्म्य ) | १३९. शंख-व्याध-संवाद, व्याधके पूर्वजन्मका वृत्तान्त | ४९१ | |
| १२०. मार्गशीर्षमासमें प्रातःस्नानकी महिमा, स्नानविधि, तिलक-धारण, गोपीचन्दनका माहात्म्य, तुलसीमालाका महत्त्व, भगवत्पूजनका विधान और शंखकी महिमा | ४४४ | १४०. भगवान् विष्णुके स्वरूपका विवेचन, प्राणकी श्रेष्ठता, जीवोंके विभिन्न स्वभावों और कर्मोंका कारण तथा भागवतधर्म | ४९३ |
| १२१. भगवान्के पूजनमें घण्टानाद, चन्दन, पुष्प, तुलसीदल, धूप और दीपका माहात्म्य | ४४७ | १४१. वैशाखमासके माहात्म्य-श्रवणसे एक सर्पका उद्धार और वैशाखधर्मके पालन तथा राम-नामजपसे व्याधका वाल्मीकि होना | ४९७ |
| १२२. स्तुतिपाठ, मन्त्रजप, साष्टांग प्रणाम तथा दामोदरमन्त्रके जपका माहात्म्य | ४४९ | १४२. धर्मवर्णकी कथा, कलिकी अवस्थाका वर्णन, धर्मवर्ण और पितरोंका संवाद एवं वैशाखकी अमावास्याकी श्रेष्ठता | ५०० |
| १२३. राजा वीरबाहुके पूर्वजन्मका वृत्तान्त एवं एकादशी-व्रत और उसका उद्यापन | ४५० | १४३. वैशाखकी अक्षय तृतीया और द्वादशीकी महत्ता, द्वादशीके पुण्यदानसे एक कुतियाका उद्धार | ५०३ |
| १२४. एकादशीके जागरण और मत्स्योत्सवकी विधि एवं माहात्म्य | ४५४ | १४४. वैशाखमासकी अन्तिम तीन तिथियोंकी महत्ता तथा ग्रन्थका उपसंहार | ५०६ |
| १२५. ब्राह्मण-भोजन, प्रसाद-भक्षण और श्रीकृष्ण-कीर्तनकी महिमा | ४५६ | ( श्रीअयोध्या-माहात्म्य ) | |
| १२६. श्रीकृष्णके बालस्वरूपका ध्यान, दामोदरमन्त्रके अधिकारी शिष्य और गुरुका लक्षण और श्रीमद्भागवतकी महिमा | ४५८ | १४५. अयोध्यापुरीकी महिमा और सीमाका वर्णन, चक्रतीर्थ एवं श्रीविष्णुहरिका माहात्म्य | ५०८ |
| १२७. मार्गशीर्षमासमें मथुरासेवनका माहात्म्य और ग्रन्थका उपसंहार | ४६० | १४६. ब्रह्मकुण्ड, ऋणमोचन तथा पापमोचन आदि तीर्थोंकी महिमा | ५१० |
| ( श्रीमद्भागवत-माहात्म्य ) | १४७. स्वर्गद्वार तथा चन्द्रहरितीर्थकी महिमा, चन्द्रसहस्रव्रतकी उद्यापनविधि | ५१२ | |
| १२८. परीक्षित् और वज्रनाभका समागम, शाण्डिल्य मुनिके मुखसे भगवान्की लीलाके रहस्य और व्रजभूमिके महत्त्वका वर्णन | ४६२ |