भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
१४८. धर्महरिकी स्थापना और स्वर्णखनि तीर्थ, रघुका सर्वस्व दान तथा कौत्सकी याचनाको सफल करना ............................................५१४१६९. कपितीर्थकी महिमा—उसमें स्नान करनेसे रम्भा और घृताचीका शापसे उद्धार ......................५७२
१४९. सम्भेदतीर्थ, सीताकुण्ड, गुप्तहरि और चक्रहरि तीर्थकी महिमा ............................................५१७१७०. रामेश्वर नामक महालिंगकी महिमा ............५७३
१५०. गोप्रतारतीर्थकी महिमा और श्रीरामके परमधाम-गमनकी कथा .............................................५२०१७१. भगवान् श्रीरामके द्वारा राक्षसोंसहित रावणका वध और सेतुके क्षेत्रमें रामेश्वरलिंगकी स्थापना५७६
१५१. क्षीरोदकतीर्थ, बृहस्पतिकुण्ड, रुक्मिणी आदि कुण्डोंका माहात्म्य ......................................५२३१७२. श्रीरामचन्द्रजीके द्वारा हनुमान्जीको ज्ञानोपदेश५७९
१५२. अयोध्याक्षेत्रके अन्य विविध तीर्थोंका वर्णन तथा वसिष्ठके मुखसे विभीषण आदिका अयोध्या-माहात्म्य-श्रवण .............................५२५१७३. हनुमान्जीद्वारा भगवान् श्रीराम और सीताका स्तवन तथा अपने लाये हुए शिवलिंगका स्थापन५८२
१५३. गयाकूप आदि अनेक तीर्थोंका माहात्म्य तथा ग्रन्थका उपसंहार ........................................५२७१७४. भगवान् रामेश्वरके प्रभावसे राजा शंकरका ब्रह्महत्या और स्त्रीहत्याके पापसे उद्धार .......५८४
( ३ ) ब्राह्मखण्ड<br>( सेतु-माहात्म्य )१७५. राजा पुण्यनिधिके यहाँ महालक्ष्मीका पुत्रीके रूपमें निवास एवं सेतुमाधवकी महिमा .......५८८
१५४. सेतुतीर्थ (रामेश्वरक्षेत्र)-की महिमा ...............५३०१७६. सेतुतीर्थकी यात्राका क्रम ...........................५९४
१५५. सेतुबन्धकी कथा तथा सेतुमें स्थित मुख्य-मुख्य तीर्थोंके नाम ...............................................५३२१७७. सेतुतीर्थका माहात्म्य तथा इस खण्डका उपसंहार५९६
१५६. चक्रतीर्थका माहात्म्य—गालवमुनि तथा धर्मकी तपस्याका वर्णन ..........................................५३५( धर्मारण्य-माहात्म्य )
१५७. सेतुबन्धन आरम्भ करनेकी बात तथा सेतुयात्राका क्रम एवं विधान ..........................................५३९१७८. धर्मकी तपस्यासे धर्मारण्यक्षेत्रकी प्रसिद्धि और उसका माहात्म्य ..........................................६०२
१५८. सीतासरोवर और मंगलतीर्थका माहात्म्य, राजा मनोजवकी कथा ..........................................५४०१७९. सदाचार—शौच, स्नान, सन्ध्या, तर्पण, बलिवैश्वदेव आदिका महत्त्व ..........................६०६
१५९. एकान्तरामनाथ, ब्रह्मकुण्ड, हनुमत्कुण्ड और अगस्त्यतीर्थका माहात्म्य .............................५४४१८०. वेदोंके स्वाध्याय, बलिवैश्वदेव, अतिथिसवा, आठ प्रकारके विवाह, पंचयज्ञ तथा व्यावहारिक शिष्टाचारोंका कथन .................................६१२
१६०. रामतीर्थ, लक्ष्मणतीर्थ और जटातीर्थकी महिमा५४६१८१. पतिव्रता स्त्रियोंके बर्ताव, धर्म और नियम तथा श्राद्ध और धर्मारण्यका महत्त्व ......................६१७
१६१. लक्ष्मीतीर्थ और अग्नितीर्थका माहात्म्य—पिशाच-योनिको प्राप्त हुए दुष्पण्यका उद्धार .............५४८१८२. धर्मारण्यवासी ब्राह्मणोंके गोत्र तथा उनकी रक्षाके लिये कामधेनुद्वारा वैश्योंकी उत्पत्ति .............६२१
१६२. चक्रतीर्थ, शिवतीर्थ, शंखतीर्थ और यमुना, गंगा एवं गयातीर्थकी महिमा—राजा जानश्रुतिको रैकवके उपदेशसे ब्रह्मभावकी प्राप्ति ................५५११८३. लोलजिह्वाक्षका वध, गणेशजीकी उत्पत्ति और देवताओंद्वारा उनका स्तवन ..........................६२३
१६३. कोटितीर्थकी महिमा—भगवान् श्रीकृष्णका अवतार, कंसवध तथा श्रीकृष्णका कोटितीर्थमें स्नान ..५५४१८४. संज्ञाकी तपस्या, अश्विनीकुमारोंका जन्म तथा वकुलादित्यकी स्थापना ................................६२६
१६४. सर्वतीर्थ तथा धनुष्कोटि तीर्थोंकी महिमा ......५५८१८५. इन्द्रेश्वरकी स्थापना और उनकी महिमा, देवमज्जनक तड़ागका माहात्म्य तथा लोहापुरके अत्याचारसे धर्मारण्यकी जनताका पलायन ....६२७
१६५. अश्वत्थामाके द्वारा सोते हुए पाण्डव-योद्धाओंका वध तथा धनुष्कोटिमें स्नान करनेसे उसका उद्धार ......................................................५६११८६. सरस्वती नदी, द्वारकातीर्थ एवं गोवत्स आदि तीर्थोंकी महिमा ..........................................६२९
१६६. धनुष्कोटिमें स्नान करनेसे परावसुका पापसे उद्धार ..५६४१८७. संक्षेपसे श्रीरामचन्द्रजीके सम्पूर्ण चरित्रका वर्णन६३१
१६७. धनुष्कोटिकी महिमा; सियार, वानर तथा दुराचार ब्राह्मणकी कथा और महालय श्राद्धकी आवश्यकता .................................५६६१८८. वसिष्ठजीके द्वारा भिन्न-भिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन, श्रीरामकी धर्मारण्य-यात्रा, वहाँके भगे हुए ब्राह्मणोंको पुनः लाकर बसाना और सत्यमन्दिरकी स्थापना करना .......................६३६
१६८. क्षीरकुण्डकी उत्पत्ति और महिमा—महर्षि मुद्गलको भगवान् विष्णुका दर्शन ................५७०१८९. रामनामकी महिमा, कलियुगका प्रभाव तथा धर्मारण्यक्षेत्रके माहात्म्यश्रवणका फल ..........६४४
( चातुर्मास्य-माहात्म्य )
१९०. चातुर्मास्य-व्रतका माहात्म्य, संयम-नियम, दया-धर्म तथा चौमासेमें अन्न आदि दानोंकी महिमा ...६४६