संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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लेकर उसके तटपर धन-धान्यसे सम्पन्न दिव्य गृह तथा अच्छे-अच्छे अन्य आवश्यक सामान ब्राह्मणोंको आदरपूर्वक देने चाहिये। अनाथ, अत्यन्त वृद्ध, विकल एवं कुटुम्बी ब्राह्मणको विशेषरूपसे देना चाहिये। जो ब्राह्मणको काठ और मिट्टीसे बना हुआ गृह दान करता है अथवा उसके लिये अमरकण्टकपर सब ओर सुन्दर-सुन्दर दिव्य भवन निर्माण कराता है, वह सर्वोत्तम दानका फल प्राप्त करता है। केवल यही दान उसके समस्त कामनाओं और प्रयोजनोंका साधक होता है। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस प्रसंगको सुनता है, वह सब पापोंसे मुक्त होता है।
शिवलोककी उत्कृष्टता, गोसेवाका महत्त्व, दानकी महिमा तथा नर्मदातटपर दान एवं शिवध्यानका माहात्म्य
**युधिष्ठिरजी बोले—**भगवन्! गोलोक कैसा बताया गया है, किस कर्मसे उसकी प्राप्ति होती है और कौन-कौन वहाँ निरन्तर रहते हैं?
**मार्कण्डेयजीने कहा—**सब लोकोंसे ऊपर महादेवजीका लोक है, वह परम दिव्य और सर्वश्रेष्ठ है। वहीं वृषभरूपसे धर्म भी विद्यमान हैं। जहाँ उनके पति वृषभरूप धर्म हैं, वहीं गोमाताएँ भी निवास करती हैं और उसी लोकमें देवताओं और असुरोंसे पूजित नर्मदादेवी भी विद्यमान हैं। उन्हींके जलसे गौएँ, बछड़े तथा सब देवता तृप्त होते हैं। ब्रह्मा, विष्णु, उमासहित महेश्वर, देवता, ऋषि, पितृगण, मातृगण तथा अन्यान्य लोकोंसहित शिवलोक और नर्मदालोक भी इस गोलोकके अन्तर्गत हैं। रुद्रलोकके जो गुण हैं, वही गोलोकके हैं। नन्दा, भद्रा, सुभद्रा, सुशीला तथा सुरभि—ये पाँच गोमाताएँ शिवलोकसे प्रकट हुई हैं। छठी नर्मदादेवी भी वहींसे सम्पूर्ण लोकोंपर अनुग्रह करनेकी इच्छासे प्रकट हुई हैं। महाराज! ये सब लोकमाताएँ अपने गुणोंद्वारा इस सम्पूर्ण जगत्को सदा तृप्त करती रहती हैं।
शिवलोकसे प्रकट हुई गौएँ यहाँ आकर घास खाती हैं, वनमें चरती हैं, निर्मल जल पीती हैं, शरीरको पवित्र करती हैं और मधुर दूध देती हैं, जिससे सम्पूर्ण जीव-जगत् जीवन धारण करता है। जैसे छोटे बच्चेवाली स्त्रियोंसे घरकी शोभा होती है, उसी प्रकार छोटे बछड़ेवाली गौओंसे जिनका घर सुशोभित है, उनके शरीरमें पाप कहाँसे रह सकते हैं। जो लोग ॐकार और नर्मदाका सदैव शिवरूपसे स्मरण करते हैं, उनका पुनः इस संसार-सागरमें जन्म नहीं होता। जो घास और जल देकर गौओंके प्रति परम भक्तिभाव रखते हैं, वे उन गौओंके प्रसादसे शिवलोकमें जाते हैं। ये गोमाताएँ सदा अनुकूल रहनेपर समस्त कामनाओंको देनेवाली हैं। जो इन कल्याणमयी गौओंकी रक्षा करते हैं, वे शिवलोकमें जाते हैं। जो उत्तम विधिके साथ एकाग्रचित्त हो भक्तिपूर्वक भगवान् शिवका पूजन करते हैं, वे निश्चय ही शिवके धामको जाते हैं। भगवान् शिवके निवासस्थानरूप तीर्थोंमें जो मनुष्य श्रद्धापूर्वक जाते हैं, विशेषतः जो नर्मदा और अमरकण्टककी यात्रा करते हैं, वे ब्रह्मा, विष्णु और शिवके लोकोंमें विहार करते हैं। राजन्! इस प्रकार तुम्हें नर्मदाका मंगलमय अवतार बताया गया है।
**युधिष्ठिरजी बोले—**मुने! अब मैं दान-धर्मका विधान सुनना चाहता हूँ। जो लोग दरिद्र और भिक्षुक हैं, उन्हें शिवधामकी प्राप्ति कैसे होती है?
**मार्कण्डेयजीने कहा—**राजन्! कमल, बिल्वपत्र, कुश और नर्मदाका जल—इन सबको भगवान् ब्रह्माजीने सामान्यतः धर्मका हेतु बताया है (ये सर्वसुलभ हैं)। सभी धर्म, पुराण और श्रुतियाँ—ये श्रद्धा और विश्वाससे ही पावन होते हैं।