भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1185

११५६ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

गौरी, जया और विजयाकुण्डका माहात्म्य, सिद्धिके उपाय तथा नागर-खण्डके पूर्वार्ध भागके श्रवणका फल

सूतजी कहते हैं—ब्रह्मर्षियो! वहीं पार्वतीजीकी सेविका जया निवास करती है और उसने वहाँ गौरीकुण्डके समीप जयाकुण्डका निर्माण किया है। जो नारी तृतीयाके दिन जयाकुण्डमें स्नान करती है वह पुत्र और सौभाग्यसे सम्पन्न तथा पतिकी प्यारी होती है। जयाकुण्डके पास ही परम उत्तम विजयाकुण्ड है। वहाँ स्नान करके वन्ध्या स्त्री भी पुत्रवती हो जाती है। इतना ही नहीं, वह कभी स्वप्नमें भी पुत्रोंके नाश या वियोगका दुःख नहीं देखती। जो काक-वन्ध्या स्त्री भी वहाँ स्नान करती है वह अनेक पुत्र प्राप्त करके स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठित होती है।

हाटकेश्वरक्षेत्रमें जो सत्ताईस लिंग हैं, उनमें सत्त्वगुण और वीर्यसे युक्त एक शिवलिंगकी भी आश्विन कृष्ण चतुर्दशीको आधी रातके समय जो पूजा करता है तथा जो श्रेष्ठ साधक पूर्वोक्त रूपसे अंगन्यास करके यजन-पूजन एवं छुरिका सूक्तका पाठ करता है और उन शिवलिंगोंके सामने स्थित होकर समस्त चराचरकी मानसिक पूजा करके दिक्पालोंमेंसे प्रत्येककी भक्तिपूर्वक अर्चना करता है, वह उसी शरीरसे उस दिव्य धामको पहुँच जाता है, जहाँ कभी भी जरा-मृत्यु तथा रोग-शोक आदि नहीं होते। इसी प्रकार चित्रेश्वरी पीठमें भी एक सिद्धि बतायी गयी है। जो माघ कृष्णा चतुर्दशीको वहाँ श्रद्धापूर्वक आगमोक्त विधिसे पीठकी पूजा करता है तथा चित्रशर्माद्वारा स्थापित हाटकेश्वर लिंगका शिवरात्रिको निशीथ कालमें एक लाख फूलोंसे भक्तिपूर्वक पूजन करता है वह उसी शरीरसे तत्काल सिद्धि प्राप्त कर लेता है।

ऋषि बोले—महामते! शुद्ध चित्तवाले ब्राह्मणोंको जिस प्रकार मोक्ष प्राप्त होता है, ऐसे उपायोंको आप बतावें।

सूतजीने कहा—दस रुद्रोंके साथ जो आनन्देश्वर लिंग है, उसके अग्रभागमें स्थित जो कुण्ड है उसमें शास्त्रीय विधिसे स्नान करके मनुष्य देवदुर्लभ सिद्धि प्राप्त कर लेता है। जो मनुष्य माघमासमें प्रातःकाल विश्वामित्रकुण्डमें स्नान करता है और ब्राह्मणको तिलसे भरा हुआ पात्र देता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो ब्रह्मलोकमें प्रतिष्ठित होता है। द्विजोत्तमो! इस प्रकार ब्राह्मणोंके लिये हितकारक और देवताओंद्वारा प्रशंसित सिद्धिका उपाय बताया गया। उस तीर्थमें अन्य जो तीर्थ और मन्दिर हैं, उन्हें भी मुनियोंने स्वर्गदायक कहा है। हाटकेश्वर महादेवजीके क्षेत्रका यह उत्तम माहात्म्य मैंने आपलोगोंसे भलीभाँति कहा है, जो सब पातकोंका नाश करनेवाला है। जो मनुष्य यहाँके सब तीर्थोंमें स्नान करके भक्तिपूर्वक सब देवस्थानोंका दर्शन करता है, वह पापी भी हो तो मुक्त हो जाता है। यह स्वामिकार्तिकेयजीके द्वारा कहे हुए स्कन्दपुराणके प्रथम खण्डका वर्णन किया गया, जो सब पापोंका नाश करनेवाला है। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक एकाग्रचित्तसे इसका पाठ या श्रवण करता है, वह इस लोकमें प्रचुर भोगोंका उपभोग करके स्वर्गलोकमें जाता है। सब तीर्थोंमें और सब प्रकारके दानोंसे जो पुण्यफल प्राप्त होता है, उसीको श्रद्धापूर्वक इस माहात्म्यका श्रवण करनेसे भी मनुष्य पा लेता है। ब्राह्मणो! पृथ्वीपर इस पुराणको सुनकर मनुष्य कोटि जन्मोंके पापसे मुक्त होता और अपने कुलका उद्धार कर देता है।

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नागरखण्ड (पूर्वार्ध) सम्पूर्ण।

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