भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
२२८. वैकुण्ठ और कैलासकी स्थिति तथा शिव और विष्णुकी अभिन्नता एवं महत्ताका निरूपण७६३२५२. गणेशजीका काशीमें जाना और लोकप्रिय होना, गणेशजीका स्तवन८४५
२२९. अगस्त्यजीका श्रीशैलपर कार्तिकेयजीकी सेवामें जाना और उनके मुखसे काशीकी महिमा श्रवण करना७६४२५३. भगवान् विष्णुका काशी-गमन, केशव एवं पादोदकतीर्थकी महिमा, धर्मक्षेत्रमें पुण्यकीर्तिका उपदेश तथा राजा दिवोदासकी निर्वाण-प्राप्ति८४६
२३०. काशीकी उत्पत्ति-कथा, काशी और मणिकर्णिकाका माहात्म्य७६६२५४. धर्मनदतीर्थके पंचनद नाम पड़नेका कारण, अग्नि-विन्दुके द्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति, भगवान्के मुखसे पंचनद एवं विन्दुमाधवतीर्थकी महिमाका निरूपण८५०
२३१. श्रीगंगाजीकी महिमा७६८
२३२. श्रीगंगाजीकी महिमा७७२२५५. भगवान् विष्णुद्वारा अपने आदिकेशव प्रभृति स्वरूपोंका वर्णन तथा अग्नि-विन्दुको मुक्ति८५३
२३३. गंगासहस्रनामस्तोत्र७७३
२३४. शिवकी कृपाके बिना काशीवासकी दुर्लभता तथा काशीकी महिमा७९४२५६. भगवान् शिवका स्वागत या वृषभध्वजतीर्थकी महिमा तथा शिवका काशीपुरीमें प्रवेश८५४
२३५. काशीपुरीकी श्रेष्ठता, हरिकेश यक्षको शिवाराधनाके द्वारा दण्डपाणिपदकी प्राप्ति और दण्ड-पाण्यष्टक-स्तोत्र७९७२५७. जैगीषव्यपर भगवान् शिवकी कृपा और उनके द्वारा शिवकी स्तुति८५७
२३६. ईशानके द्वारा ज्ञानोद (ज्ञानवापी) तीर्थका प्राकट्य, ज्ञानवापीकी महिमाके प्रसंगमें सुशीला (कलावती)-की कथा, काशीके विविध तीर्थोंका वर्णन८०१२५८. काशीके ब्राह्मणोंको भगवान् शिवका वरदान तथा काशीक्षेत्रकी महिमा८५९
२३७. ज्ञानवापीकी महिमा और उसके सेवनसे माल्यकेतु और कलावतीको तारक ब्रह्मकी प्राप्ति८०४२५९. परापरेश्वर और व्याघ्रेश्वर लिङ्गकी महिमा, भगवान् शिवद्वारा व्याघ्ररूपधारी दैत्यका वध८६२
२३८. संक्षेपसे सदाचार और उसके महत्त्वका वर्णन८०६२६०. हिमवान्के द्वारा काशीमें शैलेश्वर लिंगकी प्रतिष्ठा८६३
२३९. संस्कारोंका संक्षिप्त परिचय, ब्रह्मचारी एवं ब्रह्मचर्य-आश्रमके धर्म८०८२६१. रत्नेश्वर लिंगकी महिमा८६५
२४०. गृहस्थ-आश्रमके धर्म, पंचयज्ञकी महिमा, काशीवासकी महत्ता तथा राजा दिवोदासको पृथ्वीके राज्यकी प्राप्ति८११२६२. कृत्तिवासेश्वर लिंगका प्राकट्य और उसकी महिमा८६६
२४१. गृहस्थोचित शिष्टाचार और धर्म८१३२६३. विभिन्न तीर्थोंके देवविग्रहोंका काशीमें आगमन और उनका स्थान८६७
२४२. वानप्रस्थ और संन्यास-आश्रमके धर्मका वर्णन, योगमार्गका निरूपण८१८२६४. दैत्योंसहित दुर्गमासुरका देवी और उनकी शक्तियोंके साथ युद्ध८७०
२४३. मृत्युसूचक चिह्नोंका वर्णन८२५२६५. दुर्गदैत्यका वध, देवताओंद्वारा देवीकी स्तुति और दुर्गानामकी प्रसिद्धि८७२
२४४. महाराज दिवोदासके धर्मपूर्ण राज्यका वर्णन८२६२६६. काशीके अट्ठाईस प्रमुख लिंगोंका संक्षिप्त वर्णन तथा ॐकारेश्वरके प्राकट्यकी कथा, ब्रह्माजीके द्वारा ॐकारेश्वरका स्तवन और उनकी महिमा८७४
२४५. भगवान् शिवके आदेशसे सूर्यका काशीमें गमन और निवास तथा लोलार्कतीर्थका माहात्म्य८२८
२४६. उत्तरार्क सूर्यकी महिमा, सुलक्षणकी तपस्या और उसपर शिव-पार्वतीकी कृपा८३०२६७. त्रिलोचन लिंगकी महिमा८७८
२४७. साम्बादित्य, द्रौपदादित्य और मयूखादित्यकी माहात्म्य-कथा८३२२६८. केदारेश्वर लिंगकी माहात्म्य-कथा८८२
२४८. गरुडेश्वरलिंग तथा खखोल्कादित्यकी प्रादुर्भाव-कथा, काशीमें गरुड़ और विनताकी तपस्या और वरदान-प्राप्ति८३६२६९. श्रीधर्मेश्वर लिंगका माहात्म्य, धर्मपीठका गौरव तथा मनोरथतृतीयाव्रतकी विधि और महिमा८८३
काशीखण्ड (उत्तरार्ध)२७०. वीरेश्वर लिंगकी महिमाके प्रसंगमें राजा अमित्रजित और मलयगन्धिनीका चरित्र८८८
२४९. अरुणादित्य, वृद्धादित्य, केशवादित्य, विमलादित्य, गंगादित्य तथा यमादित्यकी महिमाका वर्णन८३८२७१. वीरेश्वरका जन्म, तपस्या, वीरेश्वर लिंगका प्राकट्य और उसकी महिमा८९१
२५०. ब्रह्माजीका दिवोदासकी सहायतासे काशीमें यज्ञ करना और दशाश्वमेधतीर्थकी महिमा८४१२७२. दुर्वासेश्वर (कामेश्वर) लिङ्गकी महिमा८९३
२५१. पिशाचमोचनतीर्थकी महिमा८४३२७३. श्रीविश्वकर्मेश्वर लिंगकी महिमा८९४
२७४. दक्षेश्वर तथा पार्वतीश्वर लिंगका माहात्म्य८९७
२७५. नर्मदेश्वर तथा सतीश्वर लिंगका माहात्म्य८९८