संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ ११ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| २७६. अमृतेश्वर लिंगकी महिमा तथा व्यासोक्त व्रत एवं धर्मोंका निरूपण ............................ | ९०० | २९५. उज्जयिनीपुरीके कनकभृंगा आदि नाम पड़नेका कारण .................................................... | ९३८ |
| २७७. काशीके तीर्थोंका संक्षिप्त वर्णन ...................... | ९०२ | २९६. काष्ठा, कला आदि कालमान, युग और कल्पभेद तथा प्रतिकल्प पुरीका माहात्म्य ................... | ९४३ |
| २७८. भगवान् शिवके मुखसे विश्वेश्वर लिंगकी महिमाका वर्णन....................................... | ९०३ | २९७. शिप्राका माहात्म्य, उसके 'ज्वरघ्नी' और 'अमृतोद्भवा' आदि नाम पड़नेका कारण ...... | ९४४ |
| २७९. पंचतीर्थी, चतुर्दश आयतन, अष्ट आयतन, शैलेशादि और एकादश आयतनोंकी यात्रा, गौरीयात्रा, गणेश-यात्रा, अन्तर्गृहयात्रा तथा विश्वनाथयात्राका वर्णन | ९०६ | २९८. जय-विजयको सनकादिका शाप, भगवान्का वाराहावतार, वाराहके हृदयसे शिप्राकी उत्पत्ति तथा उसका माहात्म्य ................................. | ९४६ |
| ( ५ ) आवन्त्यखण्ड<br>( अवन्तीक्षेत्र-माहात्म्य ) | २९९. खातासंगम तथा उसके निकटवर्ती तीर्थोंकी महिमा, राजा युगादिदेवके धर्ममय राज्यकी प्रशंसा.... | ९४८ | |
| २८०. सनत्कुमारजीके द्वारा महाकालतीर्थकी श्रेष्ठताका निरूपण................................................... | ९०९ | ३००. गयातीर्थकी महिमा, पुरुषोत्तममास और पुरुषोत्तम-तीर्थकी महत्ता तथा गोमतीकुण्डका माहात्म्य | ९४९ |
| २८१. महाकालवनमें भगवान् शिवका प्रवेश, कपालमोचन, देवताओंद्वारा स्तवन तथा महापाशुपतव्रतकी महिमा................................................... | ९१० | ३०१. गंगेश्वर और विश्वेश्वरतीर्थका माहात्म्य, बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय, ब्रह्माजीका देवताओंको विष्णुसहस्रनामस्तोत्रका उपदेश देना ............ | ९५१ |
| २८२. रुद्रभक्तिका निरूपण तथा महाकालक्षेत्रमें निवास करनेवाले मनुष्योंके नियम......................... | ९१३ | ३०२. भगवान्का वामनरूपसे प्रकट हो बलिसे तीन पग भूमि माँगना और वामन-कुण्डकी महिमा | ९६१ |
| २८३. हालाहल दैत्यका वध, रुद्रसरोवरकी महिमा तथा कुशस्थलीमें चार समुद्रोंका आगमन और उसका माहात्म्य ................................... | ९१५ | ३०३. भैरवतीर्थ और नागतीर्थकी महिमा ............. | ९६२ |
| २८४. शंकरवापी, शंकरादित्य, गन्धवती नदी, हर-सिद्धिदेवी, वटयक्षिणी, पिशाचतीर्थ, शिप्रागुप्तेश्वर आदि तथा हनुमत्केश्वरकी महिमा............ | ९१६ | ३०४. नृसिंहतीर्थकी महिमा................................. | ९६३ |
| २८५. महाकालकी परिक्रमा, यात्रा और विभिन्न देवताओंके दर्शनका माहात्म्य ................... | ९१९ | ३०५. कुटुम्बेश्वर, देवप्रयाग तथा कर्करोजतीर्थकी महिमा .................................................... | ९६४ |
| २८६. वाल्मीकिकी तपस्या और वाल्मीकेश्वरकी महिमा .... | ९२० | ३०६. अवन्तीक्षेत्रके महत्त्वपूर्ण तीर्थ, देवता, वहाँकी यात्राके क्रम एवं माहात्म्यका वर्णन ............ | ९६६ |
| २८७. शुक्रेश्वर आदिके पूजनकी महिमा, पंचेशानी यात्राका माहात्म्य तथा पद्मावती आदिके दर्शनका फल .. | ९२२ | ( रेवाखण्ड ) | |
| २८८. अंकपादतीर्थकी महिमा, श्रीकृष्णके द्वारा मरे हुए गुरुपुत्रके लाये जानेकी कथा .............. | ९२३ | ३०७. राजा युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा पुरूरवाकी तपस्यासे नर्मदाजीके मर्त्यलोकमें आगमनका वर्णन ..................................... | ९७० |
| २८९. लड्डुकप्रिय गणेश, कुसुमेश्वर, मार्कण्डेयेश्वर, ब्रह्माणीदेवी, ब्रह्मेश्वर, यज्ञवापी, रूपकुण्ड, अनङ्गेश्वर तथा सोमेश्वरका माहात्म्य ........ | ९२६ | ३०८. राजा हिरण्यतेजाके तपसे नर्मदाका अवतरण ..... | ९७२ |
| २९०. नरकोंका संक्षिप्त वर्णन; केदारेश्वर, जटेश्वर, इन्द्रेश्वर, कुण्डेश्वर, गोपेश्वर, आनन्देश्वर तथा रामेश्वरके दर्शन-पूजनका माहात्म्य............. | ९२८ | ३०९. नर्मदाका मर्त्यलोकमें आकर पुरुकुत्सको अपना पति बनाना तथा नर्मदास्नानकी महिमा ........ | ९७३ |
| २९१. सौभाग्य आदि तीर्थोंकी महिमा, अर्जुनको इन्द्रसे सूर्यप्रतिमाकी प्राप्ति तथा अवन्तीमें उसकी स्थापना और उनके दर्शनका माहात्म्य ........ | ९२९ | ३१०. नर्मदा तटवर्ती अनन्तपुर एवं व्यासतीर्थकी महिमा..................................................... | ९७५ |
| २९२. भगवान् सूर्यकी अष्टोत्तरशत नामोंद्वारा स्तुति तथा अन्यान्य तीर्थोंकी महिमा.................... | ९३३ | ३११. वरांगना-नर्मदासंगम तथा कपिलातीर्थका माहात्म्य, महाराज मनुकी त्रिपुरीयात्रा और नर्मदासे वरदान पाना.............................................. | ९७६ |
| २९३. स्वर्णक्षुर आदिकी महिमा, अन्धकासुरका युद्ध, नरदीप एवं शंखोद्धार आदिका माहात्म्य ...... | ९३४ | ३१२. भृगुतीर्थ और भास्करतीर्थका माहात्म्य.......... | ९७९ |
| २९४. ॐकारेश्वर आदिका महत्त्व तथा अन्धकासुरको शिवगणोंमें श्रेष्ठ स्थानकी प्राप्ति.................. | ९३६ | ३१३. सोमतीर्थ, ब्रह्मकुण्ड, ब्रह्मोश्वर लिंग, सिद्धेश्वर लिंग तथा संगमतीर्थकी महिमा................. | ९८१ |
| ३१४. ध्रुवेश्वर, वाराह, चान्द्रायण, द्वादशादित्य तथा गांजालतीर्थकी महिमा, राजा हरिकेशकी शुद्धि | ९८२ | ||
| ३१५. नर्मदा और मत्स्याके संगमका माहात्म्य, महर्षि आपस्तम्बके द्वारा गौओंकी महत्ताका प्रतिपादन तथा तीर्थके प्रभावसे निषादोंका मछलियों-सहित उद्धार .......................................... | ९८४ |