संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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[ १२ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ३१६. कलहंसेश्वरतीर्थका प्रादुर्भाव और उसका माहात्म्य | ९८७ | ३३७. अमरावतीके दक्षिण विष्णुमन्दिरकी महिमा, मेघ-वनका महत्त्व तथा विभिन्न तीर्थोंकी महाशक्तियोंके नाम .............................. | १०२५ |
| ३१७. नर्मदापुरका माहात्म्य, जमदग्निको कामधेनुकी प्राप्ति, कार्तवीर्यद्वारा मुनिका वध और धेनुका अपहरण तथा परशुरामद्वारा कार्तवीर्यका वध | ९८९ | ३३८. अशोकवनिकातीर्थमें महाराज रविश्चन्द्रके द्वारा यज्ञ, दान तथा मुनियोंका उद्धार ............. | १०२७ |
| ३१८. शिवनेत्रकुण्ड तथा जनकतीर्थका माहात्म्य .. | ९९० | ३३९. वागीश्वरतीर्थमें राजा ब्रह्मदत्तके यज्ञमें प्रेतोंका उद्धार तथा सहस्रावर्त आदि तीर्थोंकी महिमा | १०२९ |
| ३१९. सप्तसारस्वततीर्थकी उत्पत्ति, शाण्डिल्या और नर्मदाके संगमकी महिमा तथा नर्मदा-कुब्जाके संगमपर रन्तिदेवका यज्ञ ...................... | ९९२ | ३४०. देवपथतीर्थ, शुक्लतीर्थ, दीप्तिकेश्वरकी महिमा, देवासुरोंके द्वारा महादेवजीकी स्तुति तथा वैष्णव-तीर्थकी महिमा...................................... | १०३० |
| ३२०. कुब्जा और नर्मदाके संगमकी महिमा, हरिकेश ब्राह्मणका परिवारसहित ब्रह्म-राक्षसयोनिसे उद्धार.............................. | ९९४ | ३४१. नर्मदाजीकी तथा भगवान् विष्णुकी स्तुति.. | १०३३ |
| ३२१. माहेश्वरतीर्थकी महिमा, राजा सालंकायनका यज्ञ ... | ९९५ | ३४२. मेघनादतीर्थका प्राकट्य और उसकी महिमा | १०३७ |
| ३२२. श्वेतकिंशुक आदि तीर्थोंकी महिमा ......... | ९९७ | ३४३. करंजेश्वर तथा कुण्डलेश्वरतीर्थका प्रादुर्भाव और माहात्म्य....................................... | १०३८ |
| ३२३. मान्धाताका चरित्र .............................. | ९९९ | ३४४. पिप्पलेश्वर, विमलेश्वर, विश्वरूपा-नर्मदासंगम तथा एक दिनमें मेघनादेश्वर आदि पाँच लिंगोंकी यात्राका माहात्म्य, राजा धर्मसेनकी कथा... | १०३९ |
| ३२४. बाणासुरके तीन पुरोंका भगवान् शङ्करके द्वारा संहार, जालेश्वरनामक बाणलिंगकी उत्पत्ति और बाणासुरको शिवलोक प्राप्ति ............. | १००१ | ३४५. मुकण्ड-आश्रममें दो गन्धर्वोंका उद्धार तथा चन्द्रमती-नर्मदा-संगम आदि अन्य तीर्थोंकी महिमा .............................................. | १०४० |
| ३२५. अमरकण्टक और यज्ञपर्वतके श्रेष्ठ तीर्थ एवं लिंग, राजा इन्द्रद्युम्नका यज्ञ और उन्हें देवोंका वरदान .............................................. | १००२ | ३४६. भानुमतीका तीर्थसेवन, शूलभेदतीर्थमें शबर-दम्पतिका उद्धार और सती भानुमतीको कैलास-धामकी प्राप्ति .................................... | १०४१ |
| ३२६. पुराणलक्षण, कलिकालका प्रभाव तथा राजर्षि वसुदानके यज्ञमें प्रकट हुई कपिला और नर्मदाके संगमका माहात्म्य .............................. | १००७ | ३४७. आदित्येश्वरतीर्थकी महिमा, मुनियोंद्वारा नर्मदाका स्तवन और उस तीर्थमें गोदानकी महिमा | १०४५ |
| ३२७. अमरावतीमें भगवान्का दैत्यसूदनरूपसे निवास तथा वहाँके अन्यान्य तीर्थों और शिव-लिंगोंका माहात्म्य .............................. | १००८ | ३४८. धनदतीर्थका माहात्म्य, पूज्य और अपूज्य ब्राह्मण, वृषोत्सर्गकी महत्ता तथा गौतमेश्वर-तीर्थकी महिमा .................................... | १०४७ |
| ३२८. अमरकण्टकपर सूत्रयागका माहात्म्य, कावेरी-संगम और पयोष्णी-संगमकी महिमा तथा वहाँके अन्य तीर्थोंके सेवनकी महत्ता ....... | १०१० | ३४९. पराशराश्रमकी महिमा, पराशरमुनिकी तपस्या, वरदान-प्राप्ति, भीमेश्वरमें गायत्री-जपका महत्त्व और नारदेश्वरतीर्थका माहात्म्य................ | १०४८ |
| ३२९. भद्ररुद्रेश्वरकी महिमा, दुर्वासाजीके द्वारा अमरकण्टकका गयातीर्थके तुल्य होना तथा राजा भरतका यज्ञ ................................ | १०१२ | ३५०. नर्मदा-नागेशके संगममें कण्ठकी ब्रह्महत्यासे मुक्ति और सद्गति .............................. | १०४९ |
| ३३०. ब्रह्माजीके द्वारा सौम्या दृष्टिसे दानवोंका निवारण तथा रुद्रके एक सौ एक नामोंद्वारा शिवजीका स्तवन . | १०१३ | ३५१. पूतकेश्वर तथा जलशायी (चक्र) तीर्थका माहात्म्य, श्रीविष्णुके द्वारा नलमेघ दानवके वधकी कथा ......................................... | १०५० |
| ३३१. कपिला-नर्मदा-संगम और ईशान आदि तीर्थोंकी महिमा, यमलोकके मार्गके कष्टों तथा अट्ठाईस नरककोटियोंका वर्णन.............................. | १०१५ | ३५२. प्रभासेश्वर, मार्कण्डेयेश्वर, संकर्षण, मन्मथेश्वर तथा एरण्डीसंगममें पुत्रप्राप्तिपदतीर्थकी महिमा, अनसूयाजीके पुत्ररूपसे ब्रह्मा, शिव और विष्णुका अवतार .................................. | १०५१ |
| ३३२. पापियोंकी नरक-यातनाका वर्णन............. | १०१९ | ३५३. सौवर्णतीर्थ, करण्डेश्वरतीर्थ, भाण्डारतीर्थ, रोहिणीतीर्थ, चक्रतीर्थ तथा धूमपाततीर्थका माहात्म्य और माहात्म्य-श्रवणका फल .................. | १०५४ |
| ३३३. दान, पुण्य, शिवध्यान और नर्मदासेवनसे नरकसे उद्धार होनेका तथा संसारसे वैराग्यका उपदेश | १०२० | ३५४. श्रीसत्यनारायण-व्रतकी विधि, ब्राह्मण और लकड़हारेकी कथा .............................. | १०५६ |
| ३३४. मातंग, मृगवन और वाराहीतार्थकी महिमा | १०२२ | ३५५. सत्यनारायण-व्रतकी महिमा, राजा उल्कामुख, साधु वणिक् और राजा वंशध्वजकी कथा | १०५८ |
| ३३५. संसारसे मुक्त होनेके लिये पाप और पाखण्डी जनोंके त्याग तथा शिव एवं नर्मदाके आश्रय लेनेका उपदेश....................................... | १०२३ | ||
| ३३६. शिवलोककी उत्कृष्टता, गोसेवाका महत्त्व, दानकी महिमा तथा नर्मदा तटपर दान एवं शिव-ध्यानका माहात्म्य .......................... | १०२४ |